कोविड -19 के कारण भविष्य में स्वास्थ्य क्षेत्र में हो सकता है व्यापक सुधार

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कोविड-19 के कारण हालांकि दुनिया भर में जन जीवन अस्त–व्यस्त हो गया और स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा
गई। कोविड – 19 और उसके कारण लागू लॉकडाउन के कारण अन्य बीमारियों के मरीजों को जरूरी
इलाज से बंचित रहना पडा लेकिन चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में कोविड – 19
का चिकित्सा के क्षेत्र में कई साकारात्मक बदलाव देखने को मिलेंगे। इनमें चिकित्सा के क्षेत्र में निवेश को
बढाया जाना, संक्रमण के नियंत्रण की बेहतर प्रणालियों को लागू किया जाना, टेलीमेडिसीन का व्यापक
उपयोग और व्यक्तिगत साफ – सफाई को अधिक महत्व दिया जाना आदि प्रमुख है।
इस विषय पर अध्ययन करने वाले शोधकर्ताओं की टीम के प्रमुख नई दिल्ली स्थित इंद्रप्रस्थ अपोलो
अस्पताल के वरिष्ठ आर्थोपेडिक सर्जन प्रो़. (डा.) राजू वैश्य ने कहा कि आने वाले समय में सरकारें
स्वास्थ्य सेवा के ढांचे में सुधार और निवेश पर अधिक ध्यान देगी जिसके कारण स्वास्थ्य सुविधाओं में
सुधार होगा। इसके अलावा चिकित्सा के क्षेत्र में टेलीमेडिसीन क्रांति की शुरूआत हो रही है और भविष्य
में स्वास्थ्य सेवाओं के प्रसार में इसकी अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका होगी। इसके अलावा स्वास्थ्य एवं
चिकित्सा के क्षेत्र में शोध एवं अनुसंधान को अधिक बढावा मिलेगा। डा़ राजू वैश्य एवं उनके सहयोगी शोधकर्ताओं ने स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली पर कोविड –
19 के परिणामों का विश्लेषण किया और उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि कोविड – 19 स्वास्थ्य देखभाल की
सुविधाओं को सुलभ बनाने में’ गंभीर मरीजों के इलाज की व्यवस्था को बेहतर बनाने में’ ओपीडी सेवा में
सुधार करने में’ स्वास्थ्य ढाचे में सुधार तथा स्वास्थ्य निवेश में सुधार जैसे
कई सकारात्मक बदलाव लाएगा। इन शोधकर्ताओं के अनुसार कोविड –19 की मौजूदा महामारी ने इस तथ्य
को उजागर किया है कि भारत सहित कई देशों में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा के लिख होने वाला खर्च बहुत
कम है और इन देशों में खासकर भारत में स्वास्थ्य के लिए अधिक निवेश किए जाने की जरूरत है तथा
सार्वजनिक एवं निजी स्वास्थ्य क्षेत्र को को सही तरीके से संचालित एवं सुव्यवस्थित किए जाने की
जरूरत है।
इन शोधकर्ताओं में प्रो़. (डॉ.) राजू वैश्य के अलावा डा़. कार्तिकेयन आयंगर, डा़. विजय जैन, डा़.
अभिषेक वैश्य, डा. अहमद मब्रोक, और डा. अकाश वेंकटेशन शामिल हैं। डा़ आयंगर नई दिल्ली के डा़.
राममनोहर लोहिया अस्पताल के अटल बिहारी वाजपेयी इंस्टीच्यूट आफ मेडिकल साइंसेस में वरिष्ठ
आर्थोपेडिक सर्जन हैं’ डा़. अहमद माब्रौक एवं डा़. विजय कुमार ब्रिटेन के साउथपोस्ट एंड ऑर्म्सकिर्क
एनएचएस ट्रस्ट के शोधकता हैं, डा. आकाश वेंकटेश ब्रिटेन के यूनिवर्सिटी हास्पीटल लंडोफ और वेलेयूनिवर्सिटी हेल्थ बोर्ड’ कोर्डिफ’ वेल्स में क्लिनिक फेलो हैं तथा डा़. अभिषेक वैश्य नई दिल्ली के इंद्रप्रस्थ
अपोलो अस्पताल में आर्थोपेडिक सर्जन हैं। इन शोधकर्ताओं ने पाया कि वायरस के संक्रमण से लोगों को बचाने’ वायरस संक्रमण के इलाज ‘ हाथों की साफ–सफाई’ संक्रमणों के नियंत्रण और स्वास्थ्य के विभिन्न् विषयो के बारे में
जानकारियों को साझा किए जाने की दर में काफी वृद्धि हुई। साथ ही साथ स्वास्थ एवं
चिकित्सा के क्षेत्र में वर्चुअल एवं रिमोट तकनीकों के उपयोग में भी अभूतपूर्व तेजी आई है।
डा़ राजू वैश्य ने कहा कि कोविड – 19 की महामारी के कारण स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में कुछ महत्वपूर्ण
संभावनाओं और अवसरों का उदय हुआ है। इस महामारी के कारण हमने कई महत्वपूर्ण सबक सीखें हैं।
ऐसे संकट के दौरान हमने सीखा है कि अपने संसाधनों का तर्कसंगत एवं अधिकाधिक उपयोग कैसे किया
जा सकता है। प्रो़. राजू वैश्य ने बताया कि कोविड – 19 भविष्य में टेलीमेडिसिन क्रांति को जन्म देगा। कोविड –
19 के दौरान स्वास्थ्य संगठनों ने स्वीकार किया कि टेलीमेडिसिन की एक महत्वपूर्ण भूमिका है और कई अस्पतालों ने टेलीमेडिसिन की सुविधा के लिए अलग विभाग बनाए हैं। वर्तमान समय में
विकसित दूरसंचार प्रौद्योगिकियां बीमारियों के निदान एवं प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। रिमोट
परामर्श के लिए टेलीफोन परामर्श, वर्चुअल फ्रैक्चर क्लीनिक और वीडियो परामर्श शामिल आदि का उपयोग तेजी
से बढा है।

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