एक दुर्लभ बीमारी के कारण 1 साल तक बेड पर रही 25 वर्षीय महिला, सफलतापूर्वक इलाज हुआ

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रेवाड़ी  में  रहने वाली 25 वर्षीय रचना देवी को एक दुर्लभ बीमारी के कारण पूरे एक साल तक बिस्तर पर रहना पड़ा। हाल ही में, फोर्टिस अस्पताल, गुरूग्राम में उसका सफलतापूर्वक इलाज किया गया। मरीज अब पूरी तरह स्वस्थ है और अपने सामान्य जीवन में वापस लौट चुकी है।
सितंबर 2019 में रचना के पूरे शरीर में सूजन और रैशेज होने लगे। लगभग 2 महीने के भीतर उसका चलना-फिरना तक बंद हो गया। उसे दिल्ली सहित कई स्थानों के कई अस्पतालों में दिखाया गया लेकिन उसकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। इस दौरान उसने बिस्तर पकड़ लिया और पूरी तरह परिवार के सहारे हो गई।
वह किस बीमारी से ग्रस्त है, इसका पता लगाना मुश्किल था। इसके बाद मरीज के रिश्तेदारों ने गुरूग्राम स्थित फोर्टिस अस्पताल की सलाह दी। वहां दिखाने पर पता चला कि मरीज डर्मेटोमायोसाइटिस नाम की एक दुर्लभ बीमारी से ग्रस्त है। इसमें मांसपेशियां कमज़ोर हो जाती हैं, सूजन आती है और त्वचा पर रैशेज पड़ते हैं। यह अर्थराइटिस का एक प्रकार है, जहां जोड़ों, त्वचा, मांशपेशियों और फेफड़ों में सूजन आ जाती है।
अर्थराइटिस को आम भाषा में गठिया के नाम से जाना जाता है। इसमें जोड़ों में सूजन, अकड़न और दर्द की शिकायत होती है। बीमारी शरीर के एक या कई जोड़ों को एकसाथ प्रभावित कर सकती है। डर्मेटोमायोसाइटिस अर्थराइटिस का एक बेहद दुर्लभ प्रकार है, जो रोगी के फेफडों, त्वचा, मांसपेशियों और आँखों को प्रभावित करता है। इसके लक्षण धीरे-धीरे या अचानक दिखाई देते हैं। सबसे आम लक्षणों में त्वचा में बदलाव, मांसपेशियों में कमजोरी और सूजन शामिल हैं।
गुरूग्राम स्थित फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट के रुमेटोलॉजी सलाहकार, डॉक्टर नवल मेंदीरत्ता ने बताया कि, “जब मैंने मरीज को देखा तो उसके चेहरे और पूरे शरीर पर रैशेज और सूजन थी। उसका चलना, बैठना, खाना मुश्किल हो गया था। जांच करने पर पता चला कि उसकी सारी मांसपेशियां सूज चुकी हैं, जिसके कारण वह अपने हांथ-पैर तक नहीं हिला पा रही थी। कई टेस्ट करने पर सीपीके का असामान्य स्तर और हाई लिवर फंक्शन्स के साथ एल्डोलेस का खुलासा हुआ। इससे डर्मेटोमायोसाइटिस की पुष्टि हुई। एक दुर्लभ बीमारी होने के कारण शुरुआत में बीमारी का निदान नहीं हो सका, जिसके कारण आज वह पूरी तरह बिस्तर पर आ गई थी।” अस्पताल में मरीज को लगभग एक महीने तक मेडिकेशन पर रखा गया, जिसमें दवाइयां और इंजेक्शन शामिल थे। मेडिकेशन धीरे-धीरे अपना असर दिखा रहा था और अब मरीज पूरी तरह स्वस्थ है। इसके बाद उसकी दवाइयों की डोज कम कर दी गई और अब एक साल बाद, लगभग सभी दवाइयां बंद की जा चुकी हैं।
डॉक्टर नवल ने अधिक जानकारी देते हुए कहा कि, “जब वह फॉलो-अप के लिए आखिर बार आई थी तो यह बताना मुश्किल था कि वह किसी बीमारी से ग्रस्त थी। वह बिल्कुल स्वस्थ नज़र आ रही थी। बीमारी का समय पर निदान नहीं होने के कारण सही इलाज में देर हो रही थी, जिसके कारण उसका शरीर ऐसी स्थिति का शिकार हो सकता था, जिसे ठीक करना मुम्किन नहीं रहता। इसलिए सभी के लिए जानना जरूरी है कि समय पर निदान के साथ अर्थराइटिस का इलाज संभव है।”

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