चेहरे एक बड़ी स्टारकास्ट वाली भव्य बजट की वो फिल्म है, जिसने ओटीटी के बजाय सिनेमा हॉल का रास्ता चुना है।

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मूवी रिव्यू :-

ऐक्टर:
अमिताभ बच्‍चन,इमरान हाशमी,अन्‍नू कपूर,रिया चक्रवर्ती,क्रिस्‍टल डिसूजा
डायरेक्टर : रूमी जाफर

श्रेणी:Hindi, मिस्‍ट्री, ड्रामा, थ्र‍िलर

अवधि:2 Hrs 19 Min

रेटिंग : 3.5 स्टार्स

इस सस्पेंस-थ्रिलर-ड्रामा में निर्देशक रूमी जाफरी के पास महानायक अमिताभ बच्चन जैसा तुरुप का पत्ता था, मगर कमजोर स्क्रिप्ट के कारण निर्देशक सही दांव लगाने में असफल रहे हैं।

अगर आप में से किसी ने कोई अपराध या जुर्म किया है, तो बहुत संभल के यहां से गुजरिएगा, क्योंकि यह खेल आपके साथ भी खेला जा सकता है।’ फिल्म की कहानी इसी लाइन पर चलती है।

चेहरे एक ऐसे व्यक्ति की कहानी है, जो सेवानिवृत्त लॉ प्रोफ़ेशनल्स के साथ कठिन समय का सामना करता है । समीर मेहरा (इमरान हाशमी) Paradoy नाम की एक एड एजेंसी का चीफ़ है । वह एक एड शूट के लिए उत्तर में कहीं हिल स्टेशन जाता है । लेकिन दिल्ली में एक काम की प्रतिबद्धता के कारण, वह भारी हिमपात के बावजूद उस पहाड़ी शहर से निकल जाता है । रास्ते में वह शॉर्ट कट से दिल्ली जाता है लेकिन एक पेड़ गिरने के कारण वह फंस जाता है । इसके ऊपर से उसकी कार अचानक खराब हो जाती है । फिर वह परमजीत सिंह भुल्लर (अन्नू कपूर) से मिलता है, जो उसे सलाह देता है कि जब तक सब कुछ ठीक न हो जाए वह उसके दोस्त के यहां आ जाए । परमजीत उसे जगदीश आचार्य (धृतिमान चटर्जी) के घर ले जाता है जहां हरिया जाटव (रघुबीर यादव) पहले से मौजूद है । जल्द ही, लतीफ जैदी (अमिताभ बच्चन) भी उनके साथ जुड़ जाता है । चौकड़ी तब समीर को बताती है कि वे रोज मिलते हैं और एक अनोखा खेल खेलते हैं । इस खेल के हिस्से के रूप में, वे एक मोक ट्रायल करते हैं क्योंकि वे सभी सेवानिवृत्त लॉ प्रोफ़ेशनल्स हैं । जगदीश आचार्य पास की अदालत में सेवानिवृत्त न्यायाधीश थे, परमजीत बचाव पक्ष के वकील थे और लतीफ मुख्य अभियोजक थे । वे समीर को इस खेल को खेलने के लिए आमंत्रित करते हैं । समीर राजी हो जाता है । चारों उसे बताते हैं कि वह उनकी अदालत में आरोपी होगा । परमजीत उसका बचाव करेगा जबकि लतीफ यह साबित करने की कोशिश करेगा कि वह दोषी है । इस बीच, जगदीश जज होंगे । लतीफ समीर को यह कबूल करने का मौका देता है कि क्या उसने कभी कोई अपराध किया है और उसे छोड़ दिया । फिर वे उस आरोप के लिए उसे आजमाएंगे । समीर, हालांकि, आत्मविश्वास से बताता है कि उसने कभी कोई अपराध नहीं किया है । लतीफ को उसके मनचाहे अपराध के लिए उस पर मुकदमा चलाने का मौका मिलता है । अपनी बातचीत के दौरान, समीर ने कहा कि वह अपने पूर्व बॉस, जी एस ओसवाल (समीर सोनी) से नफरत करता था क्योंकि वह एक अत्याचारी था । समीर ने यह भी खुलासा किया कि ओसवाल की हाल ही में मृत्यु हो गई और उन्होंने उसका पद संभाला । इस पर लतीफ ने ओसवाल की ‘हत्या’ के लिए उसे अपने दरबार में पेश करने का फैसला किया । समीर हैरान है और यह स्पष्ट करता है कि उसने उसे नहीं मारा है । लेकिन लतीफ अदालत को बताता है कि वह अपनी कानूनी प्रतिष्ठा को दांव पर लगाने के लिए तैयार है और अगर वह यह साबित करने में विफल रहता है कि समीर ओसवाल की ‘हत्या’ का हिस्सा नहीं है, तो वह इस खेल को फिर कभी नहीं खेलेगा । समीर थोड़ा आशंकित है लेकिन फिर उसे पता चलता है कि उसे चिंता करने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि यह सिर्फ एक खेल है। लेकिन उसकी चिंता तुरंत दूर हो जाती है जब उसे पता चलता है कि हरिया जाटव वकील या जज नहीं था । वह वास्तव में एक जल्लाद था और उसने फंदा तैयार रखा है, क्या आरोपी को उनकी अदालत में दोषी साबित किया जाना चाहिए ! आगे क्या होता है यह पूरी फ़िल्म देखने के बाद पता चलता है ।महानायक अमिताभ बच्चन और इमरान हाशमी फिल्म का प्लस पॉइंट हैं। दोनों ही कलाकारों ने फिल्म को बांधे रखने का पूरा प्रयास किया है। मेगा स्टार बिग बी तो अपने हाव-भाव और संवाद अदायगी में बीस ही साबित होते हैं, मगर इमरान हाशमी भी उन जैसे कद्दावार अभिनेता के सामने कमतर साबित नहीं हुए हैं। हमारी न्याय प्रणाली पर फिल्म में बिग बी का अपनी बैरिटोन आवाज में 12-15 मिनट का एक लंबा मोनोलॉग है, जो आप इंडिविजुअली सुनेंगे, तो वाह-वाह करेंगे, मगर कहानी के साथ वह तारतम्यता नहीं बैठा पाता। अन्नू कपूर, धृतिमान चटर्जी, रघुबीर यादव और सिद्धार्ध कपूर ने अपने किरदारों के साथ न्याय किया है। ये फिल्म 30 अप्रैल 2021 को सिनेमाघरों में रिलीज़ होने वाली थी, लेकिन सिनेमाघरों के बंद होने कारण फिल्ममेकर्स ने इस फिल्म की रिलीज़ डेट को आगे बढ़ा दिया है, अब ये फिल्म 27 अगस्त 2021 को सिनेमाघरों में रिलीज़ होगी।

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