‘हम दो हमारे दो’ रोमांटिक-कॉमेडी में राजकुमार-कृति ने बिखेरा जादू

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हम दो हमारे दो
कलाकार :-राजकुमार राव , परेश रावल , कृति सेनन , रत्ना पाठक और अपारशक्ति खुराना
लेखक:- दीपक वेंकटेशन और प्रशांत झा
निर्देशक:-अभिषेक जैन
निर्माता:-दिनेश विजन
ओटीटी:-डिज्नी प्लस हॉटस्टार
रेटिंग:-3/5

शादी के बाद लड़की क्या चाहती है? इस सवाल के उतने ही जवाब हो सकते हैं जितनी लड़कियां हैं. हम दो हमारे दो भले ही परिवार नियोजन का दशकों पुराना चर्चित नारा हो मगर फिल्म इसे नए संदर्भ में पेश करती है. जब बचपन में मां-बाप को खो चुकी नायिका नायक से कहती है कि वह उसी लड़के से शादी करेगी, जिसकी एक स्वीट-सी फैमेली हो और जिसने एक प्यारे-से डॉगी को एडॉप्ट किया हो. मुश्किल यह कि लड़का अनाथ है और लड़की से वह डर के मारे सच नहीं बताता. अतः अपने लिए मां-बाप की तलाश करता है. मां-बाप मिल तो जाते हैं मगर उनका भी एक अतीत है.

कहानी में नायक नायिका में प्रेम होने से पहले की गलतफहमियां हैं। प्रेम का थोड़ा सा लीक से इतर इजहार है। इकरार है। लेकिन, इसरार इस बात का है कि नायिका को शादी ऐसे घर में करनी है जिसमें फैमिली हो और एक प्यारा सा कुत्ता भी हो। लेकिन नायक आसान काम यानी कि कुत्ता ढूंढने से पहले मुश्किल का यानी कि माता पिता ढूंढने का शुरू करता है। और बाकी की फिल्म चुटकुलों और जबर्दस्ती हास्य पैदा करने की कोशिशों में खर्च हो जाती है।

हम दो हमारे दो लगातार उतार-चढ़ाव के साथ आगे बढ़ती है. जिसमें राजकुमार और कृति की भूमिका रोमांटिक-कॉमिक है, वहीं परेश और रत्ना पाठक शाह इसमें संवेदनाएं पैदा करने का काम करते हैं. सभी कलाकारों का अभिनय अच्छा है. राजकुमार के दोस्त के रूप में अपरीक्षित खुराना ने अपना काम बखूबी किया है. सहायक कलाकारों ने फिल्म को गढ़ने में यहां अहम भूमिका निभाई है. राजकुमार राव लगातार इस तरह की पारिवारिक फिल्मों में अपने लिए खास जगह बना रहे हैं, जबकि कृति शुरुआती करिअर में फार्मूला भूमिकाएं करने के बाद प्रयोग के जोखिम लेने लगी हैं. मिमी के बाद यह उनकी लगातार दूसरी फिल्म है, जिसमें उनका अभिनय निखर कर आया है.

निर्माता दिनेश विजन की इस साल की ये आखिरी फिल्म है। ‘रुही’ सिनेमाघरों में रिलीज हुई। एक शानदार फिल्म ‘मिमी’ उन्होंने नेटफ्लिक्स को दी। डिज्नी प्लस हॉटस्टार पर को वह इससे पहले ‘शिद्दत’ दे चुके हैं और ‘हम दो हमारे दो’ यूं लगता है कि जैसे इस ओटीटी को पैकेज डील में मिल गई है। ‘फिल्म हम दो हमारे दो’ में ऐसा कुछ नहीं है कि दर्शक इसमें शुरू से आखिर तक दिलचस्पी बनाए रखें। परेश रावल का अभिनय अब एक ऐसे ढर्रे पर आ चुका है कि दर्शक उनके अभिनय शुरू करने से पहले ही जान जाता है कि उनके हाव भाव क्या होने वाले हैं। रत्ना पाठक से काफी उम्मीदें फिल्म में रहीं लेकिन उन्होंने भी निराश किया। इस मामले में मनु ऋषि चड्ढा का अभिनय तालियां बजाने लायक जरूर रहा।

 

 

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