कांग्रेस नेता सलमान ख़ुर्शीद की नई किताब ‘सनराइज़ ओवर अयोध्या’ किताब को लेकर मचा है बवाल

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विवाद किताब के एक पन्ने पर हिंदुत्व से जुड़ी एक लाइन पर है. बीजेपी और वीएचपी से जुड़े कुछ नेताओं का आरोप है कि किताब में हिंदुत्व के ताज़ा वर्जन की तुलना जिहादी गुट ISIS और बोको हराम से की गई है.

वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ग़ुलाम नबी आज़ाद ने इस मुद्दे पर ख़ुल कर अपनी असहमति जताई है .

ग़ुलाम नबी आज़ाद ने ट्वीट किया, “सलमान ख़ुर्शीद अपनी नई किताब में भले ही हम हिंदुत्व को हिंदू धर्म की मिलीजुली संस्कृति से अलग एक राजनीतिक विचारधारा मानकर इससे असहमति जताएं. लेकिन हिंदुत्व की तुलना आईएसआईएस और जिहादी इस्लाम से करना तथ्यात्मक रूप से ग़लत और अतिशयोक्ति है.

 किताब लिखने की मंशा को ज़ाहिर करते हुए उन्होंने समाचार एजेंसी एएनआई को दिए साक्षात्कार में कहा, ” लोगों को लगता था कि 100 साल लगेंगे फ़ैसला आने में. फिर लोगों को लगा कि ये फ़ैसला तो बहुत जल्दी आ गया. अब जब फ़ैसला आ गया है, बहुत लंबा फ़ैसला था.”

“1500 पेज मैंने पढ़ा और फिर दोबारा पढ़ा और समझने की कोशिश की. तब तक लोग इस फ़ैसले को बिना पढ़े अपनी राय दे रहे थे. कुछ कह रहे थे – मुझे अच्छा नहीं लगा कि आपने मस्जिद नहीं बनने दी, कुछ ने कहा मुझे अच्छा नहीं लगा कि आपने मंदिर बनवा दिया.”

“लेकिन किसी ने पढ़ा नहीं, समझा नहीं कि सुप्रीम कोर्ट ने क्या किया? क्यों किया? कैसे किया? इसलिए मेरा ये दायित्व बनता है कि इस फ़ैसले को समझाऊँ. मैं इस कोर्ट से संबंध रखता हूँ. लोगों को बताऊँ कि फ़ैसले में त्रुटि है या नहीं. मैंने माना कि ये अच्छा फ़ैसला है. आज के हालात जो देश में है, उसमें मरहम लगाने का एक रास्ता है. और ऐसी बात फिर न हो इसका एक प्रयास है.

किताब का वो ‘विवादित हिस्सा’ छठे चैप्टर “द सैफ़रन स्काई” का हिस्सा है, जिसमें अंग्रेज़ी में एक लाइन लिखी है.

“Sanatan Dharma and classical Hinduism known to sages and saints was being pushed aside by robust version of Hindutav, by all standards a political version similar to jihadist Islam of groups like ISIS and Boko Haram of recent years.”

जिसका हिंदी अर्थ है :

“भारत के साधु-संत सदियों से जिस सनातन धर्म और मूल हिंदुत्व की बात करते आए हैं, आज उसे कट्टर हिंदुत्व के ज़रिए दरकिनार किया जा रहा है. आज हिंदुत्व का एक ऐसा राजनीतिक संस्करण खड़ा किया जा रहा है, जो इस्लामी जिहादी संगठनों आईएसआईएस और बोको हराम जैसा है.”

खुर्शीद ने अपनी किताब में दक्षिणपंथी रुझानों की आलोचना करते हुए लिखा है कि अब हिंदू राष्ट्र की बात करना बहुत आम है। हालांकि, सरकार के स्तर पर आधिकारिक तौर पर इसकी बात नहीं होती। खुर्शीद ने यह भी लिखा है कि हिंदू राष्ट्र के कॉन्सेप्ट को कुछ हलकों से चौंकाने वाला समर्थन भी मिल रहा है। इसके लिए उन्होंने नेशनल एकेडमी ऑफ लीगल स्टडीज ऐंड रिसर्च, हैदराबाद (NALSAR) के प्रमुख और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के पूर्व रजिस्ट्रार प्रोफेसर फैजान मुस्तफा का उदाहरण दिया है। खुर्शीद ने दावा किया है कि प्रोफेसर मुस्तफा ने हाल के दिनों में एक तरह से यह कहने की कोशिश की है कि अगर हम हिंदू राष्ट्र बन गए तो हमारी तमाम मौजूदा राजनीतिक दुश्वारियां खत्म हो सकती हैं।

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