तेजस एक्सप्रेस रद्द आईआरसीटीसी ने दिल्ली-लखनऊ और मुंबई-अहमदाबाद के बीच चलने वाली तेजस ट्रेन को अगली सूचना तक रद्द करने का फ़ैसला किया है

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भारत में चलने वाली पहली कॉरपोरेट सेक्टर की ट्रेन ‘तेजस’ पर कुछ समय के लिए ब्रेक लग गया है. आईआरसीटीसी ने दिल्ली-लखनऊ और मुंबई-अहमदाबाद के बीच चलने वाली तेजस ट्रेन को अगली सूचना तक रद्द करने का फ़ैसला किया है. यह फ़ैसला दिल्ली-लखनऊ तेजस एक्सप्रेस के लिए 23 नवंबर से और मुंबई-अहमदाबाद तेजस एक्सप्रेस के लिए 24 नवंबर से लागू है.तेजस ट्रेन उन पहली ट्रेनों में शुमार थी जिनको देश भर में लगने वाले लॉकडाउन के पहले ही 19 मार्च 2020 को बंद कर दिया गया था. इसके बाद त्योहारों के सीज़न को देखते हुए 17 अक्तूबर 2020 को इन्हें दोबारा से शुरू किया गया था.लेकिन महीने भर बाद इसे दोबारा बंद करने की नौबत आ गई.

तेजस एक्सप्रेस भारतीय रेल और आईआरसीटीसी का एक नया प्रयोग माना जा रहा था. चर्चा इस बात की थी कि अगर ये प्रयोग सफल हुआ तो अन्य रूट पर भी दोहराया जाएगा.

इस रेल सेवा को भारत की पहली निजी या कॉरपोरेट सेवा भी कहा जाता है. आईआरसीटीसी ने तेजस को रेलवे से लीज़ पर लिया है और इसका कमर्शियल रन किया जा रहा है. आईआरसीटीसी अधिकारी इसे प्राइवेट के बजाए कॉरपोरेट ट्रेन कहते हैं.

आईआरसीटीसी के मुताबिक़ इन ट्रेनों को इतनी कम सीटों पर चलाने से ट्रेन के लिए ज़रूरी ख़र्च निकालना मुश्किल हो रहा था.

आईआरसीटीसी की दलील है कि कोविड-19 बीमारी का क़हर ख़त्म होने के बाद ये रेलगाड़ियां पटरी पर लौट सकती हैं.

लेकिन एक सच्चाई ये भी है कि औसतन ये ट्रेन कभी भी 100 फ़ीसद सीटें भर कर नहीं चलीं.

आईआरसीटीसी के अनुमान के मुताबिक़ अगर ट्रेन 70 फ़ीसद सीट भर कर चलती हैं तो उनका ‘ब्रेक इवन’ हासिल किया जाता है.

‘ब्रेक इवन’ यानी ट्रेन चलाने के लिए ज़रूरी ख़र्च यात्रियों से निकालना. दरअसल, इन ट्रेनों को आईआरसीटीसी ने कॉरपोरेट अंदाज़ में चलाने के लिए तीन साल के लिए लीज़ पर लिया था. इसमें केटरिंग के लिए थर्ड पार्टी को कॉन्ट्रेक्ट दिया गया था. बाक़ी का ऑपरेशन जैसे बुकिंग, ट्रेन लाना ले जाना वगैरह ख़ुद आईआरसीटीसी देख रही थी. ट्रेन चलाने के लिए आईआरसीटीसी को एक ‘ऑपरेटिंग कॉस्ट’ रेलवे को देना होता था, जिसका एक बड़ा हिस्सा होता है ‘हॉलेज़ चार्ज’. रेलवे की पटरियों, स्टेशन और दूसरी सुविधाओं का इस्तेमाल जब कोई दूसरी पार्टी करती है तो उसके एवज़ में रेलवे प्राइवेट पार्टी से ‘हॉलेज़ चार्ज’ वसूल करती है. आईआरसीटीसी को ‘हॉलेज़ चार्ज’ के रूप में 950 रुपये प्रति किलोमीटर प्रति दिन के हिसाब से रेलवे को देना पड़ता था. दिल्ली से लखनऊ रूट पर चलने वाली तेजस एक्सप्रेस का ही उदाहरण ले लीजिए. 511 किलोमीटर एक तरफ़ की दूरी है. जाना और आना मिला लें तो लगभग 1022 किलीमीटर की दूरी है. यानी लगभग 10 लाख रुपये तो आईआरसीटीसी को केवल ‘हॉलेज़ चार्ज’ के रूप में एक तेजस ट्रेन के लिए देने पड़ रहे थे. इसके अलावा ड्राईवर, गार्ड और दूसरे स्टॉफ़ की सैलरी है अलग से. सूत्रों के मुताबिक़ एक दिन का ‘ऑपरेटिंग कॉस्ट’ तक़रीबन 15 लाख रुपये बैठ रहा था. जो ट्रेन बंद होने की सूरत में आईआरसीटीसी को अब रेलवे को नहीं देना होगा.  तेजस ट्रेनें रद्द करके आईआरसीटीसी अपना यही ‘ऑपरेटिंग कॉस्ट’ बचाना चाहती है. तेजस एक्सप्रेस के दस डिब्बों में 20 कोच क्रू तैनात होते थे. ये सभी आईआरसीटीसी की कर्मचारी नहीं हैं, बल्कि एक अन्य प्राइवेट कंपनी के ज़रिए इनकी सेवाएं ली जा रही थीं. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आख़िर उन ट्रेन होस्टेस का अब क्या होगा? इस पर आईआरसीटीसी के अधिकारी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं और ना ही प्राइवेट कंपनी वाले. दोनों का कहना है फ़िलहाल ये क्रू मेंबर प्राइवेट कंपनी के साथ ही हैं. ऐसे स्टॉफ़ जो आईआरसीटीसी के इस फ़ैसले से प्रभावित होंगे उनकी संख्या मुश्किल से 50-60 लोगों की होगी. लेकिन सवाल है कि आगे कितने दिन तक ऐसे क्रू मेंबर्स को बैठा का सैलरी दी जाएगी? नाम ना बताने की शर्त पर एक दूसरे अधिकारी ने बताया कि केटरिंग के लिए जो लाइसेंस फ़ीस आईआरसीटीसी ने ले रखी थी, आपात स्थिति में वो फ़ीस केटरिंग कॉन्ट्रेक्ट वालों को वापस की जा सकती है.

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