केरल पवेलियन में मसालों ने लगाया भीड़ का तड़का

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केरल के मसालों को लेकर भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले में पिछले कुछ वर्षां में जबरदस्त रूझान मिला है और अधिकांश लोग मेले के दौरान केरल पवेलियन में अच्छी गुणवत्ता वाले मसाले खरीदने ही आते हैं। एक स्पष्ट प्रवृत्ति यह भी देखी गयी है कि लोग पूरे साल भर के लिए मसाले खरीदते हैं। मसालों और भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग किए गए विषयगत स्टॉल में सबसे ज्यादा कारोबार इलायची के लिए होता है। काली मिर्च और कॉफी कतार में आगे आते हैं। इडुक्की और वायनाड जैसे राज्य के विभिन्न हिस्सों में उगाई जाने वाली इलायची की आठ किस्मों को यहां प्रदर्शित किया गया है।

पवेलियन के एक कर्मचारी ने कहा, ’इस बार एलेप्पी हरी इलायची की थोक व्यापारियों से अधिक पूछताछ हो रही है। केरल के मसालों की खुदरा मांग बहुत बड़ी है। मांग इतनी ज्यादा है कि हम खुदरा मांग, खासकर जीआई टैग वाली वस्तुओं की मांग को पूरा करने में सक्षम नहीं हो पा रहे हैं।’ वायनाड रोबस्टा कॉफी, अरेबिका कॉफी, और जीरकसला और गंधकसला के चावल ब्रांड भी थोक व्यापार डीलरों के बीच बहुत रुचि पैदा कर रहे हैं। ग्रामीण विकास विभाग और कुदुम्बश्री द्वारा संचालित स्टालों में विभिन्न मसालों और करी शक्ति की भारी मांग है। स्टालों पर बिकने वाली अन्य वस्तुओं में अदरक, हल्दी, लौंग, नारियल उत्पाद और दालचीनी शामिल हैं।

राज्य में जीआई टैग वाले 19 उत्पादों का संग्रह है, जो यह दर्शाता है कि यह उत्पाद किसी विशेष स्थान और जलवायु की स्थिति के लिए विशिष्ट है। इन पारंपरिक उत्पादों में मालाबार काली मिर्च, एलेप्पी कॉयर, एलेप्पी हरी इलायची, वायनाड रोबस्टा कॉफी, मानसून मालाबार रोबस्टा कॉफी, मानसून मालाबार अरेबिका कॉफी, नवारा की चावल की किस्में, कैपड, पोक्कली, पलक्कदन मट्टा, जीरकसला और गंधकसला, कुट्टियट्टूर आम, चेंगालिकोडन केला, वाझक्कुलम अनानास, एडयूर मिर्च, बलरामपुरम साड़ी, अरनमुला कन्नडी (मिरर) और सेंट्रल त्रावणकोर गुड़ शामिल हैं। लंबे समय तक चलने वाले उत्पाद कृषि स्टाल में उपलब्ध हैं, लेकिन वर्तमान में, वे खुदरा बिक्री के लिए उपलब्ध नहीं हैं।

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