हांगझोऊ 2022 एशियाई पैरा गेम्स के भारतीय विजेताओं को सम्मानित किया। ब्लैकबेरीज़

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ब्लैकबेरीज़ ने नई दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित अपने स्टोर में विजेताओं की सफलता का जश्न मनाया, जिन्होंने कुल 111 पदक जीते, जिसमें 29 स्वर्ण, 31 रजत और 51 कांस्य पदक शामिल थे। ब्रांड को पीसीआई के साथ साझेदारी में चीन में भारतीय दल को ‘ऑफिशियल सेरेमोनियल पार्टनर’ के रूप में उनकी ड्रेस तैयार करने का सम्मान मिला था। वैश्विक भारतीयों की फैशन जरूरतों को पूरा करने वाले महत्वाकांक्षी भारतीय मेन्सवियर ब्रांड ब्लैकबेरीज़, ने हाल ही में आयोजित हुए चौथे एशियाई पैरा गेम्स 2022 में भारत की 111 पदकों की अभूतपूर्व जीत का जश्न मनाया, जिसे 22-28 अक्टूबर 2023 के दौरान हांगझोऊ में आयोजित किया गया था।

ब्लैकबेरीज़ द्वारा आयोजित पैरालंपिक विजेताओं के सम्मान समारोह में अपनी सम्मानजनक उपस्थिति दर्ज कराएंगे। श्री सिंह देश में पैरा-स्पोर्ट्स के विकास के पीछे एक प्रेरक शक्ति हैं। ब्लैकबेरीज़ ने ‘ऑफिशियल सेरेमोनियल पार्टनर’ बनने के लिए भारतीय पैरालंपिक समिति (पीसीआई) के साथ पार्टनरशिप की और मेगा इवेंट में भाग लेने वाले भारतीय दल की ड्रेस को तैयार किया। “हमें इन विजेताओं पर बहुत गर्व है, जिन्होंने सभी कठिनाइयों को पार करते हुए जीत हासिल की और अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश के गौरव को बढ़ाया। उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत, दृढ़ संकल्प और सभी कठिनाइयों के खिलाफ सफलता प्राप्त करने के लिए लोगों का सम्मान और आदर प्राप्त किया है।

यह भारतीय कपड़ों का प्रतिष्ठित ब्रांड, पुरुषों के कपड़ों के नवीन, स्टाइलिश और जबरदस्त फिटिंग रेंज की अद्वितीय गुणवत्ता के लिए जाना जाता है।

रूबीना फ्रांसिस, पैरालिंपियन शूटर और एशियाई खेलों की पदक विजेता, ने दोनों पैरों में क्लबफुट के साथ जन्म लिया था, जिससे उसके परिवार को भावनात्मक और आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। बाहरी धारणाओं के बावजूद, उन्होंने सहजता और अटूट भावना का प्रदर्शन किया। 2015 में 16 साल की उम्र में, रूबीना ने अपने शूटिंग करियर की शुरुआत की और पिछले नौ वर्षों में 20 अंतरराष्ट्रीय पदकों का प्रभावशाली संग्रह बनाया। एक महत्वपूर्ण उपलब्धि में, उन्होंने पोडियम पर खड़े होने और 2022 में हांगझोऊ एशियाई पैरागेम्स में अपने देश का झंडा फहराने के अपने सपने को पूरा किया।

प्रणव सूरमा, जिनको 2011 में 16 साल की उम्र में एक गंभीर दुर्घटना के परिणामस्वरूप रीढ़ की हड्डी में चोट लग गई थी, उनकी कमर के नीचे का हिस्सा लकवाग्रस्त हो गया, जिससे उनके जीवन में एक रूकाव आ गया। एशियाई पैरागेम्स के बारे में जानकारी हासिल करके, उन्होंने अपनी सीमाओं से आगे बढ़ने और एक सार्थक जीवन को पुनः खोजने का निर्णय लिया।

धर्मेंद्र गुर्जर, जो झझारपुरा, जमूरा, करौली (राजस्थान) से हैं, पैरा-एथलेटिक्स में एक उल्लेखनीय हस्ती हैं। उन्होंने 2021 में, क्रॉस कंट्री में एक कांस्य पदक हासिल किया और 2022 राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में 1500 मीटर और 3000 मीटर स्पर्धाओं में दो स्वर्ण पदक जीते। वर्तमान में, वह निपुण पैरा-एथलीट अंकुर धामा के लिए मार्गदर्शक के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। धर्मेंद्र के मार्गदर्शन में, अंकुर ने पैरालिंपिक में दो स्वर्ण पदक जीतकर उल्लेखनीय सफलता हासिल की। पैरालंपिक के मंच पर अंकुर धामा की जीत में धर्मेंद्र गुर्जर की विशेषज्ञता और समर्थन का एक महत्वपूर्ण योगदान है।