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फिल्म तुंबाड रि-रिलीज

‘तुम्बाड’ 13 सितंबर को फिर से सिनेमाघरों में दस्तक देने जा रही है। इस हॉरर फिल्म को आलोचकों की खूब सरहना मिली थी। सोहम शाह ने लिखा है, “तुम्बाड के दरवाजे बस खुलने ही वाले हैं। 2018 में रिलीज हुई ‘तुम्बाड’ ने भारतीय फोकल हॉरर फिल्मों के लिए नए मानक स्थापित किए थे। इस फिल्म की कहानी, शानदार सिनेमैटोग्राफी और प्रभावशाली बैकग्राउंड स्कोर ने इसे दर्शकों और आलोचकों से खूब सराहा। यह फिल्म एक तरह से भारतीय सिनेमा में एक मील का पत्थर मानी जाती है।

इस फिल्म के निर्देशक राही अनिल बारवे हैं, जबकि आनंद गांधी क्रिएटिव डायरेक्टर के रूप में जुड़े हैं और आदेश प्रसाद सह-निर्देशक हैं। फिल्म की कहानी मितेश शाह, आदेश प्रसाद, बारवे और गांधी ने मिलकर लिखी है। फिल्म का निर्माण सोहम शाह, आन्नंद एल. राय, मुकेश शाह और अमिता शाह ने किया है। इसके अलावा, सोहम शाह के साथ फिल्म में ज्योति माल्शे ने भूमिकाएं निभाई हैं। 13 सितंबर 2024 को सिनेमाघरों में ‘तुम्बाड’ का आनंद उठाएं और जानिए क्यों यह फिल्म भारतीय सिनेमा में एक अनोखा और मनमोहक अनुभव है।

फिल्म की कहानी
फिल्म की कहानी 1918 के तुंबाड में शुरू होती है। हमें मिलाया जाता है सदाशिव और उसके बड़े भाई विनायक से। उनकी विधवा मां (ज्योति मालशे) जर्जर हवेली में रहने वाले अपने अपने ससुर की सेवा में व्यस्त रहती हैं। वहीं दोनों भाईयों को एक छोटी सी झोपड़ी में गुजारा करने में काफी परेशानी होती है। इस झोपड़ी नें उनके साथ रहती हैं उनकी पर दादी जो कि एक मॉन्सटर हैं और उन्हें जंजीरों में बांध कर रखा जाता है। इन्हें तभी खाना खिलाना होता है जब ये सो रही हों। उसे केवल एक नाम से डर लगता है और वो नाम हो ‘हस्तर’। इसके बाद कहानी और पीछे जाती है, जहां देवी मां का एक लालची बेटा है हस्तर, जिसे शाप है कि उसे कभी सोने और खाने की लालच की वजह से कभी पूजा नहीं जाएगा। शाही परिवार इस शाप को अनदेखा कर देता है और देवी मां और हस्तर के लिए एक मंदिर बनवाया जाता है। एक बरसात वाले दिन, विनायक जंजीरों में बंधी अपनी पर दादी यानी उस मॉन्स्टर को खोल देता है और हस्तर के खजाने के बारे में पूछता है। उसकी लालच बढ़ जाती है और वो खजाना पाने के लिए वापस लौटने की कसम खाता है।

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