फिल्म ‘द बंगाल फाइल्स’ आज सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है।

फिल्म रिव्यू- द बंगाल फाइल्स
कलाकार :सिमरत कौर, दर्शन कुमार, पल्लवी जोशी, मिथुन चक्रवर्ती, अनुपम खेर, शाश्वत चटर्जी
निर्देशक : विवेक अग्निहोत्री
रेटिंग : 4/5
कहानी
फिल्म की कहानी दो समानांतर टाइमलाइन में आगे बढ़ती है। पहली टाइमलाइन आज के दौर की है, जहां सीबीआई अफसर शिवा पंडित (दर्शन कुमार) को बंगाल में एक दलित लड़की सीता की गुमशुदगी की जांच के लिए भेजा जाता है। अपनी तहकीकात के दौरान उसकी मुलाकात होती है मां भारती (पल्लवी जोशी) से, जो न सिर्फ अंग्रेजों के खिलाफ लड़ चुकी हैं, बल्कि 1946 के डायरेक्ट एक्शन डे की प्रत्यक्षदर्शी भी रही हैं। दूसरी हमें 1946 के अशांत बंगाल में ले जाती है, जहां युवा भारती बनर्जी (सिमरत कौर रंधावा) अपने साथी अमरजीत अरोड़ा (एकलव्य सूद) संग नोआखाली दंगों और आतंकवादी सरवर हुसैनी (नमाशी चक्रवर्ती) की बर्बरता का सामना करती है। इस हिंसा में वह अपने जस्टिस पिता (प्रियांशु चटर्जी), अपनी मां और अपने प्रेमी अमरजीत, सबको खो देती है। भारती की यादों के जरिए शिवा को वर्तमान केस की परतें खोलने का रास्ता देती है। सभी सुराग आखिरकार जा टकराते हैं फिल्म में धार्मिक उन्माद, हिंसा और कत्लेआम के दृश्य इतने तीखे हैं कि दर्शक असहज हो उठते हैं। र्शन कुमार (शिवा) अपने रोल के साथ न्याय किया। इसके विपरीत, हताश शराबी और कटी जुबान वाले किरदार में मिथुन चक्रवर्ती गहरी छाप छोड़ने में सफल रहते हैं। अनुपम खेर भी महात्मा गांधी की भूमिका को सहजता से निभा ले जाते हैं। सपोर्टिंग कास्ट की बात करें तो मदालसा शर्मा, दिव्येंदु भट्टाचार्य, प्रियांशु चटर्जी, पुनीत इस्सर, अनुपा अरोड़ा, मोहन कपूर और सौरव दास ने अपनी-अपनी भूमिकाओं में ठीक-ठाक काम किया है



