किसी भी फिल्म फेस्टिवल में पहली बार एक बातचीत ने सबको भावुक कर दिया — जगरण फिल्म फेस्टिवल 2025 का सबसे शक्तिशाली पल”

जगरण फिल्म फेस्टिवल 2025 का तीसरा दिन भावनाओं और अर्थपूर्ण बातचीत से भरा रहा। दिन की शुरुआत अनुपम खेर द्वारा निर्देशित तन्वी द ग्रेट की स्क्रीनिंग से हुई, जिसके बाद लेखक अंकुर सुमन के साथ एक ज्ञानवर्धक सत्र हुआ। यह चर्चा धीरे-धीरे बेहद व्यक्तिगत और भावनात्मक मोड़ ले गई जब दर्शकों में मौजूद एक अभिभावक ने अपनी संघर्ष की कहानी साझा की—उन्होंने परिवार से न मिलने वाले सहयोग, एक विशेष बच्चे को पालने की चुनौतियों और अपने सबसे बड़े डर, यानी अपनी अनुपस्थिति में बच्चे की सुरक्षा और भलाई की चिंता व्यक्त की। इसके बाद बिटवीन क्लासरूम्स एंड कैमरा सत्र हुआ, जिसमें इनायत वर्मा ने अपनी ताज़ा सोच और अनुभव साझा किए। वहीं, अभिनेता जयदीप अहलावत ने अपने मास्टरक्लास में अभिनय की बारीकियों पर गहन अंतर्दृष्टि दी। फिल्म पॉलिसीज़ और इंसेंटिव्स पर आयोजित सत्र में उत्तर प्रदेश, दिल्ली और मध्य प्रदेश ने फिल्मकारों के लिए अपनी दृष्टि साझा की। वहीं, JFF अनटाइटल्ड फिल्म कॉन्टेस्ट नेटवर्किंग ब्रीफ़ ने उभरते रचनाकारों को सहयोग के अवसर दिए। अशिष रंजन का वर्चुअल प्रोडक्शन सत्र तकनीक और कहानी कहने के संगम का गवाह बना। दिन का समापन अभिनेता रजत कपूर और निर्माता राधेश्याम पिपलावा की बातचीत से हुआ, जिसमें उन्होंने स्वतंत्र सिनेमा की कला और मजबूती पर चर्चा की और अपनी आने वाली फिल्म पुतुल का प्रीमियर प्रस्तुत किया।
फेस्टिवल का नया सेगमेंट JFF लिटिल लाइट्स – ए सेलिब्रेशन ऑफ यंग वॉइसेज़ आज इनायत वर्मा की मौजूदगी से खास बना। इस बहुमुखी बाल कलाकार ने बेहद ईमानदारी और सादगी से बताया कि कैसे वह अपनी पढ़ाई और अभिनय को संतुलित करती हैं। उन्होंने कहा,
“मैं शूटिंग पर अपनी किताबें लेकर जाती हूं। लंच ब्रेक और शॉट्स के बीच पढ़ाई करती हूं। मुझे लगता है कि पढ़ाई को मजेदार तरीके से लेना चाहिए, बोझ समझकर नहीं। इसी से मैं पढ़ाई और अभिनय दोनों को साथ ले जा पाती हूं।” उनकी सादगी, बुद्धिमत्ता और कल्पनाशीलता ने दर्शकों को गहराई से प्रभावित किया।
इसके बाद, सिनेप्रेमियों ने अभिनेता जयदीप अहलावत का मास्टरक्लास देखा, जिसमें उन्होंने अनुशासन, मेहनत, स्क्रिप्ट चुनने और अविस्मरणीय किरदार बनाने की कला पर अपने अनुभव साझा किए। भूमिकाएं चुनने के अपने नज़रिए पर उन्होंने कहा— “कहानी का नायक नहीं होता, नायक की कहानी होती है। ज़रूरी है कि आप कहानी चुनें, नायक अपने आप आ जाएगा। भूमिका के पीछे मत भागो, कहानी की ताक़त देखो।”
दिन का समापन अभिनेता रजत कपूर और निर्माता राधेश्याम पिपलावा के बीच एक अनोखी बातचीत से हुआ। दोनों ने स्वतंत्र सिनेमा की कला, जोखिम और मुख्यधारा से परे कहानी कहने की खुशी पर चर्चा की। रजत कपूर ने कहा— “फिल्म बनाने की हर प्रक्रिया अलग होती है। जब आप लिखते हैं तो आप अकेले होते हैं और अपनी दुनिया रचते हैं, जो बेहद आनंदमय है। फिल्म बनाते समय 120 से भी ज्यादा लोगों का साथ और एक तरह की खूबसूरत अफरातफरी होती है, जिसे मैं बहुत पसंद करता हूं। फिल्म सेट पर होना अपने आप में एक अद्भुत अनुभव है।”
जैसे ही तीसरे दिन का समापन हुआ, जगरण फिल्म फेस्टिवल ने एक बार फिर यह साबित किया कि यह सिर्फ एक फेस्टिवल नहीं, बल्कि कहानियों, विचारों और लोगों का ऐसा संगम है जो सिनेमा के वर्तमान और भविष्य को आकार देता है।



