क्या बिहार में फिर लौट रहा है जंगलराज? मधुबनी में अधिवक्ता चंद्र किशोर झा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत ने कानून-व्यवस्था पर खड़े किए गंभीर सवाल

बिहार में कानून-व्यवस्था और आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मधुबनी जिले के मैलाम गांव निवासी अधिवक्ता चंद्र किशोर झा, जिन्हें क्षेत्र में वकील साहब के नाम से जाना जाता था,और समाज में उनका योगदान अधिक से अधिक रहती थी की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। दिनदहाड़े हुई इस घटना और उसके बाद सामने आई परिस्थितियों ने बिहार की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 18 अक्टूबर 2026 की सुबह अधिवक्ता चंद्र किशोर झा को एक अज्ञात व्यक्ति का फोन आया था। बताया जाता है कि फोन पर बातचीत के बाद वह संबंधित व्यक्ति से मिलने के लिए घर से निकले थे। कुछ समय बाद उनके परिजनों को फोन के माध्यम से सूचना दी गई कि उनका सड़क दुर्घटना में एक्सीडेंट हो गया है।
सूचना मिलते ही परिजन घटनास्थल पर पहुंचे। बताया गया कि घटना मधुबनी जिले के रामखेतरी गांव के समीप कमला छौर इलाके में हुई थी। स्थानीय लोगों की मदद से घायल अधिवक्ता को अस्पताल पहुंचाया गया। लेकिन अस्पताल में चिकित्सकीय जांच के दौरान जो बातें सामने आईं, उन्होंने पूरे मामले को संदिग्ध बना दिया।
परिजनों के अनुसार, चिकित्सकीय जांच में उनके शरीर पर मारपीट से जुड़ी चोटों के संकेत मिले, जिसके बाद यह आशंका गहराने लगी कि मामला महज सड़क दुर्घटना का नहीं, बल्कि उनके साथ मारपीट किए जाने का भी हो सकता है। गंभीर रूप से घायल अधिवक्ता जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करते रहे, लेकिन आखिरकार 27 अक्टूबर 2026 को उन्होंने दम तोड़ दिया।
इस घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर वह कौन व्यक्ति था, जिसका फोन आने के बाद अधिवक्ता घर से निकले थे? यदि यह सड़क दुर्घटना थी, तो शरीर पर मारपीट के निशान कैसे आए? क्या उन्हें किसी साजिश के तहत बुलाया गया था? क्या इस पूरे मामले की गहराई से जांच की जा रही है?
*सबसे बड़ा सवाल बिहार की कानून-व्यवस्था पर है।*
जब दिनदहाड़े एक अधिवक्ता के साथ ऐसी घटना होने की बात सामने आती है और एक सप्ताह तक जिंदगी की जंग लड़ने के बाद उनकी मौत हो जाती है, तो आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता होना स्वाभाविक है। आखिर बिहार में आम आदमी कितना सुरक्षित है? क्या लोग अब अपने घरों से निकलते समय भी सुरक्षित महसूस नहीं कर सकते?
बिहार में जंगलराज की वापसी को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहसें होती रही हैं, लेकिन ऐसी घटनाएं शासन-प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था को लेकर जवाबदेही तय करने की चुनौती खड़ी करती हैं।
*प्रशासन से प्रमुख मांगें*
1. 18 अक्टूबर 2026 की पूरी घटना की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
2. अधिवक्ता को फोन करने वाले अज्ञात व्यक्ति की पहचान कर उससे पूछताछ की जाए।
3. घटनास्थल के आसपास के सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल कॉल डिटेल्स की जांच की जाए।
4. पोस्टमार्टम रिपोर्ट एवं मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर घटना की वास्तविक परिस्थितियों का खुलासा किया जाए।
5. यदि मारपीट या किसी आपराधिक साजिश की पुष्टि होती है, तो दोषियों की पहचान कर उन्हें जल्द गिरफ्तार किया जाए।
6. पीड़ित परिवार को न्याय और सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
*अब सवाल सिर्फ चंद्र किशोर झा को न्याय दिलाने का नहीं, बल्कि बिहार के हर नागरिक की सुरक्षा का है।* प्रशासन को इस मामले में गंभीरता दिखाते हुए सच्चाई जनता के सामने लानी चाहिए, ताकि किसी निर्दोष परिवार को न्याय के लिए दर-दर भटकना न पड़े।
लोकतंत्र में कानून का राज होना चाहिए, भय का नहीं। बिहार की जनता को आश्वासन नहीं, बल्कि सुरक्षित माहौल और न्याय चाहिए।
प्रकाशन से पहले जरूरी बात: इस खबर में मारपीट, अज्ञात फोन करने वाले व्यक्ति और दुर्घटना की परिस्थितियों से संबंधित बातें फिलहाल परिजनों के कथन/प्राप्त जानकारी के रूप में रखी गई



