नोवोनॉर्डिस्क एजुकेशन फाउंडेशन द्वारा इम्पैक्ट इंडिया : 1000-डे चैलेंज की दूसरे सालकी रिपोर्ट जारी

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विश्व मधुमेह दिवस (वर्ल्ड डायबिटीज डे) के उपलक्ष्य में नोवो नॉर्डिस्क एजुकेशन फाउंडेशन ने आज इम्पैक्ट इंडिया : 1000-डे चैलेंज प्रोग्राम के दूसरे साल की रिपोर्ट का विमोचन किया. इस प्रोग्राम की शुरुआत दो वर्ष पहले भारत में डायबिटीज से पीड़ित लोगों में एचबीए1सी का स्तर अगले 1000 दिनों में 1% पर लाकर डायबिटीज से जुड़ी जटिलताओं और आर्थिक बोझ को कम करने के लक्ष्य के साथ की गयी थी. स्वास्थ्य की देखभाल के लिए सरकार की आयुष्मान भारत जैसी पथ-प्रदर्शक पहल और डिजिटल प्लैटफॉर्म से उपलब्ध रियल-टाइम डेटा से मिले उत्साह से यह प्रोग्राम नोवो नॉर्डिस्क इस यकीन को और पुष्ट करेगा कि अब डायबिटीज पर विजय प्राप्त करना संभव है. भारत में अभी 77 मिलियन लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं और डायबिटीज से जुड़ी स्वास्थ्य सेवाओं पर हर साल देश को 64,500 करोड़ रुपये खर्च करना पड़ रहा है. अगर डायबिटीज को नियंत्रित नहीं किया गया, तो यह खर्च और बढ़ने की आशंका है. एचबीए1सी ब्लड सुगर के दीर्घकालिक नियंत्रण का सबसे बढ़िया संकेतक है और और तीन महीनों के लिए औसत ब्लड शुगर नियंत्रण प्रदान करता है.

कोविड-19 के मौजूदा दौर में जनवरी-जून 2018 से जुलाई-सितम्बर 2020 तक कुछ शहरों में एचबीए1सी के स्तरों में गिरावट देखी गयी है. इनमें हैदराबाद, कोलकाता और जयपुर सम्मिलित हैं, किन्तु अधिकाँश शहरों में एचबीए1सी के स्तरों में उछाल देखा गया है.

  • दक्षिण भारत के हैदराबाद में एचबीए1सी का स्तर 24 महीनों में 8.64% से घट कर  8.02% पर आ गया (0.62% की कमी).
  • उसी अवधि में पूर्व में कोलकाता में यह स्तर 8.24% से कम होकर 7.96% हो गया (0.28% की गिरावट).
  • उसी अवधि में उत्तरी भारत में जयपुर में स्तर 8.30% से घट कर 8.01% पर आ गया (0.29% की कमी).

औषधि मंत्रालय के ब्यूरो ऑफ़ फार्मा पीएसयूज ऑफ़ इंडिया (बीपीपीआइ) के सीईओ, श्री सचिन कुमार सिंह, आईआरएस ने सुझाव दिया कि, “भारत सरकार ने डायबिटीज के ज्ञात और निरूपित लोगों के निर्धारित दवाओं की नियमित आपूर्ति की उपलब्धता के पर्याप्त इंतजाम किए हैं. इम्पैक्ट इंडिया प्रोग्राम से प्राप्त आँकड़े भारत के प्रमुख शहरों में एचबीए1सी के स्तर का रुझान समझने में सहायक होंगे. हम नोवो नॉर्डिस्क एजुकेशन फाउंडेशन को इस बात के लिए बधाई देते हैं कि उनलोगों ने एक ऐसा साधन तैयार किया है जिसके सहारे विभिन्न नीति-निर्माता और चिकित्‍सक विश्लेषण करके उसके अनुसार डायबिटीज से पीड़ित लोगों के लिए सही चिकित्सीय दृष्टिकोण और नीतियाँ तैयार कर सकते हैं.”

भारत में डेनमार्क के राजदूत महामहीम फ्रेड्डी स्वेन ने कहा कि, “नोवो नॉर्डिस्क एजुकेशन फाउंडेशन ने भारत में डायबिटीज संबंधी जागरूकता के क्षेत्र में प्रशंसनीय कार्य किया है. मैं ‘इम्पैक्ट इंडिया : 1000-डे चैलेंज प्रोग्राम’ में योगदान करने वाले सभी लोगों को बधाई देता हूँ. इस प्रोग्राम ने भारत में डायबिटीज से पीड़ित लोगों के जीवन में जो सकारात्मक अंतर पैदा किया है, वह सराहनीय है.”

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