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सीईआरटी-इंडिया और आईएसएसी ने मिलकर शुरू किया नेशनल साइबर सिक्योरिटी स्कॉलर प्रोग्राम

भारत की साइबर सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के लिए भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (सीईआरटी-इंडिया ) और इन्फॉर्मेशन शेयरिंग एंड एनालिसिस सेंटर (आईएसएसी) ने मिलकर नेशनल साइबर सिक्योरिटी स्कॉलर प्रोग्राम (एनसीएसएसपी) के छठे बैच के लिए संयुक्त प्रमाणपत्र जारी करने की घोषणा की है। यह कार्यक्रम भारत के साइबर सुरक्षा क्षेत्र में पेशेवरों को उच्च-स्तरीय तकनीकी और प्रबंधकीय कौशल से लैस करने के उद्देश्य से संचालित किया जा रहा है।

एनसीएसएसपी का उद्देश्य देश में विश्वसनीय और नैतिक साइबर सुरक्षा नेतृत्व विकसित करना है। यह कार्यक्रम प्रतिभागियों को न केवल तकनीकी विशेषज्ञता प्रदान करता है, बल्कि उन्हें कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों—जैसे बिजली, स्वास्थ्य, और परिवहन – में डिजिटलीकरण के दौरान आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार करता है। आईएसएसी के संस्थापक निदेशक राजशेखर पुल्लभटला ने कहा, “एनसीएसएसपी भारत के साइबर सुरक्षा परिदृश्य का महत्वपूर्ण हिस्सा बन रहा है। सीईआरटी-इंडिया की इस पहल में भागीदारी से यह सुनिश्चित होता है कि प्रतिभागियों को उच्चतम तकनीकी और नैतिक मानकों के अनुरूप प्रशिक्षित किया जाए, जिससे वे देश के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को सुरक्षित रख सकें।”

प्रोग्राम की विशेषताओं के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि 12 क्षेत्रों में विस्तृत प्रशिक्षण, जिसमें एआई, मशीन लर्निंग, और स्पेस साइबर सुरक्षा जैसे आधुनिक विषय शामिल हैं। रियल-लाइफ सिमुलेशन गेम्स के माध्यम से वास्तविक दुनिया की साइबर चुनौतियों से निपटने की तैयारी तथा फिजिकल साइबर रेंज के माध्यम से स्मार्ट सिटी इंफ्रास्ट्रक्चर पर साइबर-फिजिकल हमलों का व्यावहारिक प्रशिक्षण के साथ ऑफ-ग्रिड लिविंग अनुभव, जो टीमवर्क और नेतृत्व कौशल को बढ़ावा देता है।

आईएसएसी के कार्यकारी निदेशक ग्रुप कैप्टन आनंद नायडू पोला (सेवानिवृत्त) ने कहा, “यह कार्यक्रम भारत के बढ़ते डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा के लिए एक विश्वसनीय और सक्षम पेशेवरों का समूह तैयार कर रहा है। सीईआरटी-इंडिया के साथ यह साझेदारी हमारे उद्देश्य को और भी मजबूती देती है।”
साइबर खतरों की बढ़ती जटिलता के मद्देनज़र, यह कार्यक्रम सीआईएसओ और साइबर सुरक्षा नेतृत्व की एक विशिष्ट टीम तैयार कर रहा है, जो सरकार, सार्वजजनिक क्षेत्र की कंपनियों, बैंकों और निजी कंपनियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

इस सहयोग के माध्यम से सरकार स्कॉलर्स की प्रतिभा का उपयोग कर सकती है, जिससे राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा क्षमता को बढ़ावा मिलेगा।

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