फिल्म समीक्षा- तारे ज़मीन पर

फिल्म : तारे ज़मीन पर
फिल्म के कलाकार: निर्माता: आमिर खान, निर्देशक: आमिर खान
मुख्य कलाकार: आमिर खान कला शिक्षक के रूप में, दर्शील सफ़ारी ईशान अवस्थी के रूप में
कहानी: अमोल गुप्ते,पटकथा: अमोल गुप्ते,संवाद: अमोल गुप्ते
संगीत निर्देशक: शंकर महादेवन, एहसान नूरानी, लॉय मेंडोंका
कुछ साल पहले ‘तारे जमीन पर’ ने भारतीय सिनेमा में ऐसी छाप छोड़ी थी, जिसकी गूंज आज भी सुनाई देती है। ‘सितारे जमीन पर’ आमिर खान की ऐसी फिल्म है जो दिल से बनाई गई है. फिल्म की कहानी आमिर खान की है. उनसे कुछ ऐसी गलतियां होती हैं कि उन्हें कम्युनिटी सर्विस किए जाने की सजा मिलती है. अब उन्हें स्पेशल किड्स को बास्केटबॉल में हुनरमंद बनाना है. बस पूरी फिल्म इसकी लेकर है. कहानी में इमोशन से लेकर कॉमेडी तक का भरपूर छौंक लगाया गया है. लेकिन फिल्म की लेंथ कुछ ज्यादा है. पहला हाफ फिल्म की टोन सेट करने में गुजर जाता है. दूसरे में मजा आता है. लेकिन कुल मिलाकर इसके लिए कसावट भरी एडिटिंग की दरकार थी. यही बात इसमें चुभती है.
‘सितारे जमीन पर’ में एक्टिंग की बात करें तो मिस्टर परफेक्शनिस्ट ने हमेशा की तरह अच्छा काम किया है. लेकिन यहां फिल्म की जान 10 स्पेशल किड्स हैं जिनकी एक्टिंग लाजवाब हैं. उनके पंच हंसाते हैं और उनकी बातें दिल को चुटकियों छू जाती है. फिल्म के निर्देशन प्रसन्ना ने बताया था कि फिल्म के लिए सभी एक्टर्स को 10-11 महीने तक ट्रेंड किया गया था, उसका असर पूरा नजर आता है. यह कहना गलत नहीं होगा कि ये बच्चे आमिर खान जैसे सुपरस्टार पर भी भारी पड़ते नजर आते हैं.
यह फिल्म ‘तारे जमीन पर’ से आगे निकल नहीं पाती है. आर.एस. प्रसन्ना ने फिल्म में अच्छे से कॉमेडी और इमोशंस को पिरोया है. आमिर खान के फैन इस फिल्म को इंजॉय कर सकते हैं. विषय आधारित फिल्में देखने वालों को भी ये फिल्म पसंद आ सकती है. फिल्म का म्यूजिक बहुत ज्यादा असरदार नहीं है. लेकिन ‘सितारे जमीन पर’ ऐसी फिल्म है जो अच्छी सोच और पूरे दिल के साथ बनाई गई है, ये फिल्म सुनील, सतबीर, लोटस, गुड्डू, राजू, बंटू, गोलू, करीम, हरगोविंद और शर्माजी के लिए एक बार देखनी तो बनती है.
रेटिंग: 3/5 स्टार



