भारत के टेक सेक्टर में बढ़ता ‘वेतन का अंतर’: AI के हुनर ने बदली तरक्की की परिभाषा

प्रमुख IIM और शीर्ष तकनीकी संस्थानों के प्लेसमेंट का ऑडिट करने वाली स्वतंत्र संस्था बी2के एनालिटिक्स (B2K Analytics) द्वारा किए गए एक विश्लेषण में 12,851 प्रोफ़ेशनल्स के करियर को परखा गया । 2023 से 2025 के बीच स्केलर के ‘मॉडर्न सॉफ्टवेयर एंड AI इंजीनियरिंग’ और ‘डेटा साइंस एंड ML (AI स्पेशलाइजेशन)’ प्रोग्राम पूरे करने वाले इन छात्रों के डेटा से एक बात साफ हो गई है: जिन्होंने AI-केंद्रित बाजार के हिसाब से अपनी तकनीकी बुनियाद को फिर से मजबूत किया, उनकी मिडियन सैलरी सीधे दोगुनी से ज्यादा हो गई, वहीं दूसरी ओर,मार्केट ने तकनीकी टैलेंट से अपनी अपेक्षाओं को पूरी तरह बदल दिया है ।
प्रोग्राम के बाद मिडियन CTC ₹8.7 लाख से बढ़कर ₹20 लाख हो गया, यानी पूरे 104% का उछाल । कुल औसत वेतन में 147% की बढ़ोत्तरी देखी गई, जिसे टॉप 25% उम्मीदवारों ने ₹45 लाख से अधिक के पैकेज हासिल कर, नई ऊंचाइयों पर पहुँचा दिया। प्रोग्राम पूरा करने वाले 12,851 छात्रों में से 11,444 को सफलतापूर्वक प्लेसमेंट मिला, जो 89% की दर है । इन फ़ेशनल्स को चुनने वाली कंपनियों में मेटा, अमेज़न, गूगल, एप्पल, माइक्रोसॉफ्ट, गोल्डमैन सैक्स, जेपी मॉर्गन, मॉर्गन स्टेनली, मैकिन्से, बीसीजी, रेज़रपे, स्विगी, फोनपे, फ्लिपकार्ट, एडोब, सेल्सफोर्स और एटलैशियन जैसे दिग्गज नाम शामिल हैं ।
बाजार ने अनुभव की कीमत को नए सिरे से आंका है, लेकिन केवल उनके लिए जिन्होंने एप्लाइड AI की गहराई के साथ बुनियादी सिद्धांतों को दोबारा सीखा है । वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की ‘फ्यूचर ऑफ जॉब्स रिपोर्ट’ ने भी AI और मशीन लर्निंग को वैश्विक स्तर पर सबसे तेजी से बढ़ती स्किल कैटेगरी बताया है । भारत का अपना टेक सेक्टर भी आज एक बड़े बदलाव से गुजर रहा है: जो कंपनियां कभी जनरल इंजीनियरिंग टैलेंट को थोक में नियुक्त करती थीं, अब वे इंटरव्यू के पहले चरण से ही AI विशेषज्ञता को सबसे बड़ा पैमाना मान रही हैं । यहाँ सबसे दिलचस्प बात यह है कि सबसे बड़ी कामयाबी उन्हें नहीं मिली जो नए थे । इनमें से कई फ़ेशनल्स के पास 3 से 7 साल का अनुभव था और प्रोग्राम से पहले उनकी मिडियन सैलरी ₹8 लाख के आसपास थी । उनकी सफलता की वजह यह नहीं थी कि उन्होंने शून्य से शुरुआत की, बल्कि जब उनके पुराने अनुभव के साथ AI की विशेषज्ञता जुड़ी, तो मार्केट ने उनके टैलेंट की वैल्यू को कहीं अधिक बढ़ा दिया ।
स्केलर नियोवार्सिटी के शिक्षार्थियों ने सबसे शानदार प्रदर्शन दिखाया, जहाँ औसत वेतन 164% बढ़कर ₹30 लाख तक पहुँच गया।
स्केलर के को-फ़ाउंडर, अभिमन्यु सक्सेना, का कहना है कि, “रोजगार की योग्यता का पैमाना बदल चुका है। कंपनियां अब ऐसे फ़ेशनल्स चाहती हैं जो AI सिस्टम के साथ सिर्फ काम न करें, बल्कि उन्हें संचालित कर सकें। ये नतीजे उसी बदलाव का प्रतिबिंब हैं।” स्केलर के CEO ऑनलाइन बिजनेस और ग्रुप CPO, अमर श्रीवास्तव मानते हैं कि, “अब सिर्फ पुराना अनुभव ही काफी नहीं है। सॉफ्टवेयर और डेटा प्रोफेशनल होने के बुनियादी सिद्धांत बदल गए हैं, और बाज़ार उन लोगों को ज़्यादा महत्व दे रहा है, जो नई दुनिया के लिए इन सिद्धांतों को ज़्यादा व्यावहारिक तरीके से सीखते हैं।“
जैसे-जैसे कंपनियाँ बार-बार दोहराए जाने वाले कामों को ऑटोमेट कर रही हैं और AI-तैयार टैलेंट को ज़्यादा प्राथमिकता दे रही हैं, प्रोफेशनल्स पर सक्षम बने रहने के लिए, लगातार अपने कौशल को बेहतर बनाने का दबाव बढ़ रहा है। इसी बदलाव को दर्शाते हुए, ETS की ‘2026 ह्यूमन प्रोग्रेस रिपोर्ट’ में पाया गया कि 89 प्रतिशत भारतीय प्रोफेशनल्स AI-आधारित कार्यस्थल में प्रासंगिक बने रहने के लिए सक्रिय रूप से नई स्किल्स सीख रहे हैं । इस पृष्ठभूमि में, यह मूल्यांकन स्पष्ट करता है कि बदलते बाज़ार की मांगों के अनुरूप ढलने और करियर में बड़ी सफलता पाने के लिए स्ट्रक्चर्ड AI अपस्किलिंग कितनी अनिवार्य हो गई है ।
प्रोग्राम के अनुसार प्रदर्शन
प्रोग्राम
औसत बढ़ोतरी
मिडियन बढ़ोतरी
टॉप 25% औसत CTC
मॉडर्न सॉफ्टवेयर और AI इंजीनियरिंग
147%
105%
₹45.6 लाख
डेटा साइंस और ML (AI स्पेशलाइजेशन)
149%
101%
₹42.4 लाख
कुल मिलाकर
147%
104%
₹45.1 लाख



