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कर्नल ढिल्लो के प्रयास और सेना की सार्थक मुहिम का नाम है “ऑपरेशन माँ”

दिल्ली में सिलेक्ट सिटी माल के सिने पॉलिश मल्टीप्लेक्स में सेना के उसी अधिकारियों के साथ प्रशासनिक सेवा के आला अफसरों के साथ मीडिया पर्सन की मौजूदगी में कश्मीर की अनेक रियल लोकेशन में शूट डॉक्यूमेंट्री फिल्म ऑपरेशन मां की विशेष स्क्रीनिंग के उपरान्त इस डॉक्यूमेंट्री के प्रेरणा स्त्रोत लेफ्टिनेंट जनरल के.जे.एस. ढिल्लन (सेवानिवृत्त) ने यहां मौजूद मीडिया से बातचीत की। उन्होंने कहा: “जब हमने घाटी में अपनी राह से गुमराह होकर आतंक का रास्ता चुन चुके युवकों को आतंक का रास्ता छोड़ के एक बार फिर अपने परिवार के साथ नई जिंदगी शुरू करने का ऑपरेशन शुरू किया तो हमने सबसे पहले इन युवकों की मां को अप्रोच किया और हमारी यह मुहिम अच्छा रंग लाई उस दौरान करीब 80 से ज्यादा युवकों ने कट्टरपंथियों के बहकावे और पड़ोसी मुल्क के लालच को छोड़ शांति का रास्ता चुना,जिसका पूरा क्रेडिट हम इनकी मां को देते है।

कर्नल ढिल्लो ने बताया इस ऑपरेशन में हमारा लक्ष्य बस इतना था कि गुमराह हो चुकी युवा पीढ़ी को किसी भी तरह से उनकी, माँ के पास वापस लाया जाए।। हम जानते है कि माँ के प्यार की ताकत का मुकाबला कोई भी हथियार नहीं कर सकता और इस्लाम में तो मां को जन्नत का दर्जा दिया गया है , और हमारी यह फिल्म इसी भावना को बखूबी दर्शाती है।
आईएन10 के निदेशक आदित्य पिट्टी ने कहा, “‘ऑपरेशन माँ’ एकता, करुणा और आशा के मूल्यों को दर्शाता है जो हमारी आज़ादी के मूल में निहित हैं।” डॉक्यूबेवी के समर खान ने कहा, हमने घाटी के लोगों के सहयोग से राष्ट्र की अंतरात्मा से जुड़ी इस कहानी पर लंबी रिसर्च के बाद कड़कती सर्दी में रीयल लोकेशन पर करीब चार महीने तक शूटिंग की।उन्होंने कहा, “घाटी भारत का अभिन्न अंग है और यहाँ का हर बेटा घर लौटने का हक़दार है। “ऑपरेशन माँ” का प्रीमियर विशेष रूप से 27 अगस्त को डॉक्यूबे पर होगा।

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