गुड्डू पंडित, कालीन भैया और मुन्ना भैया की वापसी प्राइम वीडियो सीरीज मिर्जापुर पर बनीं मिर्जापुर द मूवी 4 सितंबर को सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है|

‘मिर्जापुर: द मूवी’ में गुड्डू पंडित, कालीन भैया और मुन्ना भैया के किरदार में अली फजल, दिव्येंदु और पंकज त्रिपाठी की वापसी हो रही है. आइए आपको बताते हैं कैसी है फिल्म मिर्जापुर द मूवी.इसे पुनीत कृष्णा ने लिखा है और एक्सेल एंटरटेनमेंट के बैनर तले रितेश सिधवानी और फरहान अख्तर ने प्रोड्यूस किया है
मिर्जापुर का मतलब अगर कोई एक नाम है, तो वो हैं कलीन भैया यानी पंकज त्रिपाठी. फिल्म में भी उनका जलवा बरकरार है. सब एक तरफ और कलीन भैया एक तरफ.
वहीं, बबलू पंडित के किरदार में जितेंद्र कुमार की एंट्री भी खूब जमती है. उन्होंने किरदार को इतनी अच्छी तरह पकड़ा है कि कुछ जगहों पर विक्रांत मैसी की याद तक नहीं आती.
बीना का किरदार पहले से ही बहुत अहम था, लेकिन फिल्म में उनकी बैकस्टोरी लगभग क्लाइमेक्स जैसा असर छोड़ती है. रसिका दुग्गल शानदार हैं.
मुन्ना भैया के किरदार में दिव्येंदु और गुड्डू भैया के किरदार में अली फज़ल, दोनों अपने-अपने किरदार में फिर से जान डाल देते हैं.
सच कहूं तो कास्ट इतनी दमदार है कि इन किरदारों को इनसे बेहतर कोई और कर पाएगा, ऐसा सोचना भी मुश्किल है. सोनल चौहान की एंट्री भी नई है और उनका ट्रैक कहानी में एक नया एंगल जोड़ता है.फिल्म में रवि किशन की नई एंट्री जबरदस्त है. उनका अंदाज बिल्कुल अलग है. महिलाओं की इज्जत करने वाला उनका किरदार बब्बन यादव काफी दिलचस्प है. उनका एक डायलॉग है-“जुबान ही मेरा कॉन्ट्रैक्ट है.” रवि किशन का पूरा ट्रैक फिल्म में एक नया रंग भरता है और उनका किरदार कहानी में अच्छी तरह फिट बैठता है.
फिल्म 2018 से शुरू होती है, जिसमें पंकज त्रिपाठी पहले ही सीन से शह और मात का खेल खेलते नजर आते हैं. वहीं जितेंद्र कुमार और अली फजल की जोड़ी भी खुद को बाहुबली बनाने की जुगत में नजर आती है. फिल्म में कैरेक्टर भले ही पुराने हैं. लेकिन नए ट्विस्ट ने फिल्म को दिलचस्प बनाया है. रवि किशन बब्बन के रोल में हैं, जो अपराध की दुनिया का बड़ा खिलाड़ी है. मुन्ना भैया का कैरेक्टर पहले एक घंटे में कतई भौकाली नहीं है. फिल्म में रवि किशन को बड़ा और प्रमुख रोल दिया गया है, जिसे ताकत चाहिये और उसकी नजर मिर्जापुर की गद्दी पर है. जबकि सीरीज में आपने देखा था कि मिर्जापुर की गद्दी की लड़ाई अंदरूनी थी. लेकिन मिर्जापूर द मूवी में बब्बन यानी रवि किशन से गद्दी की लड़ाई देखने को मिल रही है. मुन्ना शुक्ला का रोल पूरी तरह ट्रिम कर दिया गया है. दिव्येंदु मिर्जापुर सीरीज की जान रहे हैं, लेकिन यहां तो उनके किरदार के ही प्राण निकाल दिए गए हैं. कुल मिलाकर कहानी में प्रयोग के चक्कर में इस घनचक्कर बना दिया गया है.
पहले हाफ के मुकाबले दूसरा हाफ थोड़ा खींचा खींचा लगता है. फिल्म में बेवजह के सीन हैं, जो फिल्म को लंबा बनाते हैं. फिल्म में सेकंड हाफ में आपको धुरंधर जैसे गाने की झलक देखने को मिलेगी. फिल्म के आखिर में डायरेक्टर खो जाते हैं. फिल्म का अंत खींचा हुआ है. रवि किशन के किरदार को काफी खींचा गया है, जिसके कारण बाकी किरदार बैकसीट पर चले जाते हैं. गुड्डू भैया और मुन्ना भैया का किरदार फीका सा लगने लगता है. मिर्जापुर का अंत आने तक डायरेक्टर कहीं ना कहीं उलझा रहता है. उन्हें समझ नहीं आता है कि दिखाना क्या है और हटना क्या है.
फिल्म को गुरमीत सिंह ने डायरेक्ट किया है और वह इस नई कहानी को पर्दे पर दिखाने में कामयाब रहे हैं. वहीं, पुनीत कृष्ण की राइटिंग फिल्म की बड़ी ताकत है. पुराने किरदारों और नई कहानी के बीच उन्होंने अच्छा संतुलन बनाया है|
रेटिंग- 3.5/5



