राष्ट्रीय

एनसीएल परियोजनाओं में ठेकेदार KCCL पर बड़े घोटाले के आरोप

जनपद सोनभद्र में संचालित Northern Coalfields Limited (एनसीएल) की झिंगुरदा और खड़िया खदान परियोजनाओं में कार्यरत ठेकेदार कंपनी Kalinga Commercial Corporation Limited (KCCL) पर गंभीर अनियमितताओं और श्रम कानूनों के उल्लंघन के आरोप सामने आए हैं।

क्षेत्रीय सांसद Chhotelal Singh Kharwar ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए केंद्रीय कोयला एवं खनन मंत्री G. Kishan Reddy को पत्र लिखकर उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। सांसद ने अपने पत्र में कहा है कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई तो यह मुद्दा प्रधानमंत्री कार्यालय तक उठाया जाएगा और आवश्यकता पड़ने पर जन आंदोलन भी किया जाएगा।
सांसद द्वारा भेजे गए पत्र की प्रतियां कोयला एवं खनन राज्य मंत्री Satish Chandra Dubey, Coal India Limited के अध्यक्ष और एनसीएल के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक को भी भेजी गई हैं।
कोयला उत्पादन और बिलिंग में हेराफेरी का आरोप – सांसद ने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि खड़िया और झिंगुरदा परियोजनाओं में मशीनरी और टिपरों से निकाले गए कोयले को ओवरबर्डन (OB) हटाने के नाम पर गलत तरीके से बिल किया जा रहा है। इससे सरकारी उपक्रम को भारी राजस्व हानि होने की आशंका जताई गई है। साथ ही वर्षा जल निकासी के लिए पर्याप्त पंप न लगाए जाने से खदान संचालन प्रभावित होने और उत्पादन में बाधा आने की बात भी सामने आई है।

डीजल उपयोग में नियमों का उल्लंघन – शिकायत में कहा गया है कि झिंगुरदा खदान में बिना वैध PESO लाइसेंस के बड़ी मात्रा में डीजल का भंडारण और उपयोग किया जा रहा है। इसके अलावा मध्य प्रदेश की अमलौरी खदान से टैक्स इनवॉइस पर खरीदा गया डीजल अवैध रूप से उत्तर प्रदेश की खड़िया खदान में भेजकर उपयोग किए जाने का भी आरोप लगाया गया है।

श्रमिकों के वेतन और सुविधाओं को लेकर सवाल – सांसद ने पत्र में उल्लेख किया है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में दीपावली के अवसर पर श्रमिकों को उत्पादन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) का भुगतान नहीं किया गया। इसके अतिरिक्त लगभग 250 श्रमिकों का ईपीएफ के लिए यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) नहीं बनाया गया है। करीब 50 श्रमिकों का अगस्त-सितंबर 2025 का वेतन भी अब तक लंबित बताया गया है।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि लगभग 300 श्रमिकों का CLIP पोर्टल में WUIN नंबर नहीं बनाया गया और उन्हें अन्य खातों से भुगतान किया जा रहा है। बिना प्रक्रिया के श्रमिकों की बर्खास्तगी का आरोप
खड़िया और झिंगुरदा परियोजनाओं से 25 से अधिक श्रमिकों को बिना वैधानिक नोटिस और अनुशासनात्मक प्रक्रिया के कार्य से हटाने की बात भी सामने आई है। इसके अलावा कार्य दिवस देने में भी पक्षपात किए जाने तथा कुछ श्रमिकों को कम दिन काम दिए जाने की शिकायत की गई है।

सुरक्षा और श्रम नियमों की अनदेखी – पत्र में आरोप लगाया गया है कि कई ऑपरेटरों और टिपर चालकों से लगातार 30 दिन तक कार्य कराया जा रहा है, जबकि उन्हें साप्ताहिक अवकाश, ओवरटाइम भुगतान और सार्वजनिक अवकाश पर दोगुनी मजदूरी नहीं दी जा रही। श्रमिकों को VTC प्रशिक्षण, चिकित्सकीय परीक्षण, विश्राम शरण, कैंटीन, प्राथमिक उपचार, पेयजल, पहचान पत्र और व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (PPE) के बिना ही कार्य पर लगाया जा रहा है।

जांच की मांग – सांसद Chhotelal Singh Kharwar ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि ऐसी अनियमितताएं न केवल सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाती हैं बल्कि श्रमिकों के अधिकारों और सुरक्षा के साथ भी खिलवाड़ करती हैं।

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