महिलाओं को सार्वजनिक शौचालयों की जानकारी उपलब्ध कराने के लिए एक इनोवेटिव ऐप-आधारित समाधान ‘हार्पिक लूकेटर’ (“हार्पिक लूकेटर ऐप”) लॉन्च करने की घोषणा की

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शौचालय की स्वच्छता से जुड़े उत्पाद बनाने वाले भारत के अग्रणी ब्रांड, हार्पिक ने सभी लोगों और सबसे खासतौर पर महिलाओं तक सार्वजनिक शौचालयों की जानकारी उपलब्ध कराने के लिए एक इनोवेटिव ऐप-आधारित समाधान ‘हार्पिक लूकेटर’ (“हार्पिक लूकेटर ऐप”) लॉन्च करने की घोषणा की है। ब्रांड ने ‘#BeFreeToPee’ कैम्पेन भी लॉन्च किया है। इस कैम्पेन में इन्हीं समस्याओं पर प्रकाश डाला गया है। यह बेहद खास लॉन्च भारत में सार्वजनिक शौचालय को खोजने से जुड़ी समस्या को हल करने की दिशा में एक समाधान पेश करता है।

सर्वे में पता चला कि 70% महिलाओं को जरूरत पड़ने पर सार्वजनिक स्थानों पर शौचालय की तलाश करने के लिए संघर्ष करना पड़ता है। इसमें यह भी कहा गया है कि वे एक साफ सुथरे शौचालय की तलाश करने में औसतन 60 मिनट खर्च करती हैं*। कई महिलाएं यात्रा करते समय या बाहर जाते समय कम पानी पीती हैं, जिसके चलते उन्हें डीहाइड्रेशन या यूटीआई जैसी सेहत से जुड़ी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। सर्वेक्षण में यह भी कहा गया है कि 78% महिलाएं सार्वजनिक शौचालयों से बचने के लिए फील्ड जॉब या लंबी यात्राओं से बचने की बात स्वीकार करती हैं*। इसके अतिरिक्त, 81% महिलाओं ने सार्वजनिक शौचालयों के उपयोग से बचने के लिए पानी पीने से परहेज करने की बात मानी है।

सौरभ जैन, रीजनल मार्केटिंग डायरेक्टर, साउथ एशिया – हाइजीन, रेकिट ने कहा, “स्वच्छ सार्वजनिक शौचालयों के बारे में जानकारी और पहुंच की कमी का सामना समाज के सभी वर्गों को करना पड़ता है। जो लोग अक्सर काम या छुट्टियां मनाने के लिए यात्रा करते हैं, उनके लिए ये चुनौतियां और भी बढ़ जाती हैं। इसके चलते कई बार उन्हें स्कूल और कॉलेज छोड़ना पड़ता है। साथ ही ऐसी नौकरियों से दूरी बनाने पड़ती है जिसमें काफी ट्रैवल करना पड़ता है। इसके अलावा उनके सामने सुरक्षा संबंधी चिंताएं और अन्य कारण भी होते हैं। ‘बी फ्री टु पी’ कैम्पेन ग्राहकों को उनकी बाथरूम और शौचालय से जुड़ी सभी समस्याओं के समाधान में मदद करने की हमारी प्रतिबद्धता का प्रमाण है।

ऐप यूजर्स को पानी, साबुन, टिशू पेपर, सफाई और प्रकाश जैसी सुविधाओं के आधार पर शौचालयों को रेटिंग देने में भी मदद करता है। इन रेटिंगों और सुविधाओं के आधार पर, यूजर्स सही जानकारी के साथ सही विकल्प चुन सकते हैं और पेशाब रोकने के संकट से मुक्ति पा सकते हैं। ‘बी फ्री टू पी’ कैम्पेन का उद्देश्य है कि महिलाओं को सार्वजनिक शौचालय उपलब्ध नहीं होने के कारण पेश आने वाली समस्याओं से मुक्त मिले।

आलाप देसाई, सीसीओ और सह-संस्थापक, tgthr ने कहा, “भारत में, पुरुषों के लिए शौचालय की तलाश करना बेहद आसान है, वहीं दूसरी ओर महिलाओं को हमेशा इस समस्या का सामना करना पड़ता है। मैंने देखा है कि मेरे बहुत से करीबी दोस्त पेशाब से जुड़ी बेचैनी का सामना करती हैं। संचार की सबसे संतोषजनक बात यह है कि उससे वास्तव में किसी का जीवन बेहतर बन सके। वास्तव में यह उत्पाद भी यही करता है। यह कोई छोटी अवधि का समाधान नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा ऐप है जिसका उपयोग आने वाले वर्षों तक हर दिन किया जा सकता है। समाधान की लंबी आयु महिलाओं के लिए जरूरी समाधान पेश करने की ब्रांड की प्रतिबद्धता का प्रदर्शित करती है।