फोर्टिस हॉस्पीटल, शालीमार बाग ने वर्ल्ड हेड एंड नेक कैंसर दिवस के मौके पर किया पेशेंट सपोर्ट मीट का आयोजन

विश्व सिर व गर्दन कैंसर दिवस के मौके पर, फोर्टिस हॉस्पीटल, शालीमार बाग ने हेड एंड नेक कैंसर पेशेंट सपोर्ट ग्रुप मीट का आयोजन किया, जिसमें 100 से अधिक मरीजों, कैंसर सरवाइवर्स, केयर गिवर्स और हेल्थकेयर एक्सपर्ट्स ने हिस्सा लिया तथा रोग से बचाव, समय पर डायग्नॉसिस, ट्रीटमेंट और रीहेबिलिटेशन के बारे में महत्वपूर्ण चर्चा की। इस कार्यक्रम ने इस बात पर मुख्य रूप से जोर दिया कि बेशक, हेड और नेक कैंसर सर्वाधिक प्रीवेंटेबल कैंसर रोगों (ऐसे कैंसर रोग जिनसे बचाव संभव है) में से हैं, ये किसी को भी प्रभावित कर सकते हैं, और इस सबंध में जागरूकता तथा समय पर मेडिकल सहायता बेहद महत्वपूर्ण है।
दुनियाभर में, सिर और गर्दन के कैंसर सार्वजिनक स्वास्थ्य संबंधी बड़ी चुनौती बने हुए हैं। दुनिया में हर साल, 9 लाख से अधिक नए मामले सामने आते हैं, और भारत इनमें एक-तिहाई का योगदान करता है, यानि यहां हर साल करीब 2.8 लाख नए मामले दर्ज किए जाते हैं। तंबाकू और शराब का सेवन इन रोगों के प्रमुख रिस्क फैक्टर्स हैं, लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि सिर और गर्दन के कैंसर केवल धूम्रपान या तंबाकू का सेवन करने वाले लोगों तक ही सीमित नहीं हैं। इसके अन्य कारणों में, ओरल हाइजिन का ध्यान नहीं रखना, गलत फिटिंग वाले डेन्चर्स, ह्यूमन पैपिलोमावायरस (एचपीवी) इंफेक्शन, देर तक धूप में रहना (खासतौर से होंठों के कैंसर का कारण), खानपान की गैर-सेहतमंद आदतों और कमजोर इम्युनिटी की वजह से भी जोखिम बढ़ते हैं। इसलिए, हर व्यक्त को हमेशा सजग और सतर्क रहने की जरूरत है। मुंह में छाले (माउथ अल्सर) जैसे लक्षण यदि दो सप्ताह से अधिक समय तक ठीक न हों, आवाज में लगातार बदलाव बना रहे, और निगलने में परेशानी हो, मुंह से अकारण रक्तस्राव हो, या मुंह के भीतर सफेद और लाल धब्बे दिखायी दें या गर्दन में गुठली/गांठ हो तो बिना देरी किए मेडिकल सहायता लेनी चाहिए।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि सिर और गर्दन कैंसर के बहुत से मामलों से बचाव संभव है और यदि रोग के शुरुआती चरण में निदान हो जाए, तो उपचार की संभावना 80–90% से भी अधिक हो सकती है, जो कि रोग की साइट एवं स्टेज पर निर्भर है। लेकिन दुर्भाग्यवश, भारत में देरी से डायग्नॉसिस एक बड़ी समस्या है, जिसकी वजह से इलाज लंबा और जटिल हो सकता है और कई बार रोगी की स्पीच, खाना निगलने, चेहरे-मोहरे तथा लाइफ क्वालिटी पर भी इसकी वजह से असर पड़ता है। पेशेंट सपोर्ट ग्रुप मीट में रेडिएशन, ओंकोलॉजी, मेडिकल ओंकोलॉजी, सर्जिकल ओंकोलॉजी तथा डेंटल साइंसेज़ से जुड़े स्पेश्यलिस्ट्स ने कई महत्वपूर्ण सत्रों को संबोधित किया और रिस्क फैक्टर, शुरुआती लक्षणों, उपचार में हुई प्रगति तथा मल्टीडिसीप्लीनरी कैंसर केयर के महत्व के बारे में जानकारी दी।
डॉ विनीता गोयल, सीनियर डायरेक्टर एवं एचओडी – रेडिएशन ओंकोलॉजी, फोर्टिस हॉस्पीटल, शालीमार बाग ने कहा, “सबसे बड़ी गलतफहमी लोगों को यह होती है कि धूम्रपान करने वाले या तंबाकू का सेवन करने वालों को ही सिर और गर्दन का कैंसर होता है। बेशक, तंबाकू और शराब बड़े रिस्क फैक्टर हैं, लेकिन ये ही एकमात्र कारण नहीं हैं। ओरल हाइजिन का ध्यान नहीं रखना, तीखे दांतों या गलत फिटिंग वाले डेन्चर्स की वजह से लगातार परेशानी बनी रहना, अक्सर अपने ही दांतों से गालों को काटना, एचपीवी इंफेक्शन और अन्य कई कारणों के चलते भी ये रोग सामने आ सकते हैं। इसलिए, हरेक व्यक्ति को रोग के लक्षणों को लेकर सतर्क होना चाहिए और लगातार दो सप्ताह से अधिक बने रहने वाले लक्षणों की अनदेखी नहीं करनी चाहिए। शीघ्र डायग्नॉसिस से इलाज की संभावनाओं में सुधार होता है और इनसे बोलने, भोजन को निगलने तथा मरीज के चेहरे-मोहरे (एपियरेंस) जैसे महत्वपूर्ण फंक्शंस को भी बरकरार रखने में मदद मिलती है।” उन्होंने कहा, “अच्छी बात यह है कि सिर और गर्दन के कई कैंसर रोगों से पूरी तरह से बचाव मुमकिन है और, यदि इनका शुरू में ही पता चल जाए तो पूरी तरह उपचार भी हो जाता है। लेकिन भारत में बहुत से मरीज अभी भी ऐसे हैं जो देर से रोग का निदान होने की वजह से रोग के एडवांस स्टेज तक बढ़ जाने पर ही अस्पताल पहुंच पाते हैं। उपचार उनके पूरे सफर का एक हिस्सा भर है। मरीजों को अक्सर खाने-पीने, बोलने, ओरल केयर, और यहां तक की भावनात्मक स्तर पर भी कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है और सामान्य जीवन में वापसी करना मुश्किल होता है। पूरी तरह से रिकवरी के लिए मल्टीडिसीप्लीनरी एप्रोच जरूरी होती है जिसमें ओंकोलॉजिस्ट, सर्जन, डेंटिस्ट, न्युट्रिशनिस्ट, स्पीच थेरेपिस्ट, साइकोलॉजिस्ट और रिहेबिलिटेशन एक्सपर्ट मिलकर मरीज की सहायता करते हैं।”
श्री नवीन शर्मा, वाइस प्रेसीडेंट एवं फेसिलिटी डायरेक्टर, फोर्टिस हॉस्पीटल, शालीमार बाग का कहना है, “सिर और गर्दन के कैंसर के खिलाफ लड़ाई में पहला हथियार जागरूकता है। हालांकि कैंसर रोगों की यह श्रेणी ऐसी है जिनसे सर्वाधिक बचाव मुमकिन है लेकिन बहुत से लोग अक्सर शुरुआती लक्षणों की अनदेखी करते हैं, जिसके चलते डायग्नॉसिस और ट्रीटमेंट दोनों में देरी होती है। इस तरह की पेशेंट सपोर्ट ग्रुप मीट के माध्यम से हम ऐसा प्लेटफार्म तैयार करना चाहते हैं जहां मरीज और उनके केयरगिवर एकजुट हो सकें और आपस में महत्वपू्र्ण जानकारी साझा कर सकें और साथ ही, उन मरीजों से भी प्रेरित होने का अवसर उन्हें मिलता है जिन्होंने इस रोग को हरा दिया है। दरअसल, सरवाइवर्स से उनके समय पर डायग्नॉसिस, सही उपचार और एक सकारात्मक मानसिकता रखने के महत्व के बारे में जानकर दूसरों को प्रेरणा मिलती है। फोर्टिस हॉस्पीटल, शालीमार बाग में हम कैंसर के बारे में जागरूकता फैलाने, शुरुआत में स्क्रीनिंग करने और मरीजों को हर स्टेज पर पूरा सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।



