फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’

फिल्म फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’
कलाकार -दिलजीत दोसांझ, नसीरुद्दीन शाह, वेदांग रैना और शारवरी
निर्देशक- इम्तियाज़ अली
रेटिंग-4/5
दिल को छू लेगी इम्तियाज़ अली की ‘मैं वापस आऊंगा’, बंटवारे में अधूरी रह गई लव स्टोरी
फिल्म की कहानी
फिल्म की शुरुआत नसीरुद्दीन शाह के किरदार ‘कीनू’ से होती है, जो डिमेंशिया से जूझ रहे हैं और असलियत और अपने ख्यालों के बीच तालमेल बिठाने की कोशिश कर रहे हैं। ‘मैं वापस आऊंगा’ फिल्म दो अलग-अलग समय में चलती है।फिल्म का पहला हिस्सा किरदारों से परिचय कराने पर केंद्रित है। एक आदमी जो किसी मकसद को पूरा करने की कोशिश में है, जो सब कुछ ठीक करने के लिए बेताब है और पूरी कोशिश कर रहा है-बिल्कुल इम्तियाज़ अली के हीरो जैसा। लेकिन फ़र्क क्या है? इस बार कहानी ऐसी नहीं है जिससे हर कोई आसानी से जुड़ सके। यह एक ऐसी सच्चाई है जिसका सामना बहुत से लोगों ने भारत-पाकिस्तान बंटवारे के उस सबसे मुश्किल दौर में किया होगा। एक दादा की अपने पुराने शहर को फिर से देखने की ज़िद के तौर पर शुरू हुई कहानी जल्द ही एक पोते के सच का पता लगाने के मिशन में बदल जाती है। इम्तियाज़ अली के ज़्यादातर कामों की तरह, ‘मैं वापस आऊंगा’ इमोशनल अनुभव देती है। जिया के लिए कीनू की तड़प अक्सर रोमांस से ज़्यादा पूजा जैसी लगती है, जो ‘लैला मजनू’ जैसी फ़िल्मों में पहले दिख चुकी है। पीछे छूट गए लोगों के साथ क्या हुआ, अपनी लेव लेडी के पास वापस आने के लिए कीनू का लगातार स्ट्रगल और फ़िल्म का एंड आपकी आंखों में आंसू ला देगा। फ़िल्म का इमोशनल असर इतना ज़बरदस्त है कि आप इसके धीमे पहले हाफ़ को भी नज़रअंदाज़ कर देते हैं।
कीनू ग्रेवाल के किरदार में वेदांग रैना ने उम्मीद से ज्यादा अच्छा परफॉर्म किया है। वहीं अफसाना के किरदार में शरवरी बहुत खूबसूरत दिखाई दीं। नसीरुद्दीन शाह जो बुजुर्ग कीनू बने हैं उन्हें फिल्म में डायलॉग कम मिले, मगर उनका अभिनय हमेशा की तरह कमाल का था।
दिलजीत दोसांझ को देखकर आपको सुकून महसूस होता है। उनके संवाद भी दिल छू जाते हैं। बाकी किरदारों का भी काम अच्छा है। फिल्म में ‘धुरंधर’ फेम दानिश पंडोर भी थे जिनका स्क्रीन टाइम कम था। इसके बाद भी वह अपने किरदार से इंसाफ करते नजर आए। मनीष चौधरी और रजत कपूर का अभिनय भी बेहतरीन था।
फिल्म का सबसे खास आकर्षण है नसीरूद्दीन शाह का अभिनय। यह फिल्म उनके करियर की सबसे शानदार फिल्मों में शामिल होगी। उन्होंने ईशर की नाजुक अवस्था के बीच उनके अंदरुनी दर्द, अपनी प्रेमिका से मिलने की तड़प और विभाजन के असर को बखूबी बयां किया है। निर्वैर की भूमिका में दिलजीत दोसांझ का अभिनय उल्लेखनीय है। वह बीच-बीच हल्के फुल्के पल लेकर आते हैं।
देखें या नहीं?
फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ पुराने दौर और नए दौर को मिलाकर बनाई गई है। अगर पुरानी कहानियां सुनने और देखने के शौकीन हैं तो यह फिल्म आपके लिए है। अगर आपको धीमी कहानियां नहीं पसंद जिनकी परतें सब्र मांगती हैं तो यह फिल्म आपके लिए नहीं है। फिल्म वन टाइम वॉच से ज्यादा है। किसी तरह की कोई अश्लीलता नहीं है। परिवार के साथ आराम से देख सकते हैं मगर बच्चों को डरा सकती है।



