आईटीसी डर्माफिक ने भारतीय त्वचा पर शिक्षा और जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से डर्माफिक इंडियन स्किन नॉलेज सेंटर (DISKC) की स्थापना की
वर्षों से भारतीय महिलाएं ऐसे स्किनकेयर सॉल्युशंस तलाश रही हैं जो वैश्विक मानकों पर आधारित हो—लेकिन अक्सर उनकी विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप नहीं होते। आईटीसी डर्माफिक ने इस चलन को बदलने का प्रयास करते हुए डर्माफिक इंडियन स्किन नॉलेज सेंटर (DISKC) की शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य भारतीय त्वचा की विशिष्टताओं और इसकी देखभाल के लिए अनुकूल सॉल्युशंस की आवश्यकता को लेकर शिक्षा और जागरूकता फैलाना है।
इस पहल के तहत, ब्रांड ने कांटार के साथ मिलकर एक अध्ययन कराया, जिसके आधार पर डर्माफिक इंडियन स्किन हेल्थ रिपोर्ट तैयार की गई—जो भारतीय त्वचा की अनूठी विशेषताओं को उजागर करने वाली अपनी तरह की पहली रिपोर्ट है।
भारतीय त्वचा सबसे हटकर है और अन्य देशों की त्वचा से बहुत अलग है। डर्माफिक इंडियन स्किन हेल्थ रिपोर्ट में भारतीय त्वचा की इन्हीं खासियतों पर प्रकाश डाला गया है। यह रिपोर्ट बताती है कि भारतीय त्वचा से जुड़ी चिंताओं को दूर करने के लिए किस तरह के समाधान और नवाचार की आवश्यकता है। नॉलेज सेंटर और इंडियन स्किन हेल्थ रिपोर्ट एक साथ मिलकर भारत की त्वचा की देखभाल की यात्रा में एक महत्वपूर्ण क्षण को चिह्नित कर रहे हैं – साथ ही भारतीय त्वचा को वैज्ञानिक रिसर्च और कंज्यूमर फोकस के केंद्र में लाते हैं।
प्रोडक्ट्स बिज़नेस के डिविजनल चीफ एग्जीक्यूटिव समीर सत्पथी ने कहा, “भारतीय त्वचा अनोखी है और इसके लिए कस्टमाइज सॉल्युशंस की आवश्यकता है। डर्माफिक इंडियन स्किन नॉलेज सेंटर की स्थापना के साथ हम भारतीय त्वचा की विशिष्ट विशेषताओं पर शिक्षा और जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इस पहल के तहत डर्माफिक इंडियन स्किन हेल्थ रिपोर्ट उपभोक्ताओं के अनुभवों से प्राप्त महत्वपूर्ण अंतर्दृष्टि प्रदान करती है, जो यह दर्शाती हैं कि भारतीय त्वचा के लिए विशेष रूप से तैयार स्किनकेयर सॉल्युशंस की कितनी आवश्यकता है। आईटीसी डर्माफिक ने हमेशा एडवांस इनोवेशन पर ध्यान केंद्रित कर अपने प्रोडक्ट पेश किए हैं, जिनका भारतीय त्वचा पर परीक्षण भी किया गया है।
कुछ प्रमुख निष्कर्ष सामने आए हैं, जो भारतीय त्वचा के बारे में बेहतर समझ विकसित करने में मदद करते हैं-
धूप, टैन और सेंसिटिविटी: भारतीय त्वचा में कोकेशियन स्किन की तुलना में 50% अधिक मेलेनिन होता है और इसलिए भारतीय स्किन में टैनिंग की संभावना अधिक होती है,
जबकि कोकेशियन स्किन अक्सर सनबर्न का सामना करती है। 81% महिलाएँ सनबर्न की तुलना में टैनिंग की शिकायतें अधिक करती हैं।
मुँहासे: मुहाँसे हमारे लिए कोकेशियन की तुलना में चिंता का बड़ा विषय हैं। हमारी त्वचा पर रोमछिद्र बड़े होते हैं*, जो अधिक सीबम सीक्रेशन के कारण होते हैं, और अधिक मुहाँसे होने का कारण बन सकते हैं। 68% महिलाओं के लिए मुहाँसे चिंता का एक प्रमुख विषय है, जिनमें से 20-25 वर्ष की आयु की 94% महिलाएँ मुहाँसे से जूझ रही हैं, जो दर्शाता है कि यह सिर्फ़ किशोरावस्था की समस्या नहीं है।



