यूपीआईटीएस 2026 का स्वाद बढ़ाएंगी कासगंज की सोनपापड़ी और मथुरा के पेड़े

उत्तर प्रदेश की पहचान केवल उसके गौरवशाली इतिहास, धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत, कृषि, उद्योग तथा पर्यटन से नहीं है। इस प्रदेश की एक अत्यंत समृद्ध पहचान उसकी खान-पान की परंपरा और पारंपरिक व्यंजनों में भी बसती है। उत्तर प्रदेश का शायद ही कोई ऐसा जनपद हो, जिसकी अपनी कोई विशिष्ट खाद्य पहचान न हो। कहीं मिठाइयों की परंपरा है, कहीं नमकीन और नाश्ते की, तो कहीं ऐसे पारंपरिक व्यंजन हैं, जिनका स्वाद पीढ़ियों से लोगों की स्मृतियों का हिस्सा बना हुआ है। इसी समृद्ध खाद्य विरासत को संरक्षित करने, स्थानीय व्यंजनों को पहचान देने और उनसे जुड़े छोटे उद्यमियों तथा पारंपरिक व्यवसायों को आगे बढ़ाने की दिशा में उत्तर प्रदेश सरकार की “एक जनपद–एक व्यंजन” (ODOC) योजना महत्वपूर्ण पहल है। यह पहल केवल किसी व्यंजन को प्रसिद्ध करने तक सीमित नहीं है। इसके पीछे एक व्यापक सोच है—स्थानीय स्वाद को पहचान देना, पारंपरिक पाक-कला को संरक्षित करना, स्थानीय रोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा देना तथा उत्तर प्रदेश के विशिष्ट व्यंजनों को बड़े बाजार तक पहुंचाना।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने के लिए उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो 2026 एक महत्वपूर्ण मंच बनने जा रहा है। 25 से 29 सितंबर 2026 तक ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में आयोजित होने वाला यह आयोजन उत्तर प्रदेश की औद्योगिक, व्यावसायिक, हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों की क्षमता को देश और दुनिया के सामने प्रस्तुत करेगा। इस बार इस मंच पर उत्तर प्रदेश के उत्पादों के साथ-साथ उसके स्थानीय स्वाद और पाक विरासत को भी विशेष पहचान मिलने की उम्मीद है। उत्तर प्रदेश की अपनी एक विशिष्ट पहचान है। यहां भाषा और बोली बदलने के साथ-साथ भोजन का स्वाद भी बदल जाता है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर पूर्वांचल और बुंदेलखंड से लेकर ब्रज एवं अवध तक, हर क्षेत्र की अपनी खाद्य संस्कृति है। इन व्यंजनों के पीछे केवल स्वाद नहीं होता। इनके पीछे स्थानीय इतिहास, सामाजिक परंपराएं, पारिवारिक अनुभव और पीढ़ियों से अर्जित पाक-कौशल होता है। किसी मिठाई की दुकान पर काम करने वाला कारीगर केवल मिठाई नहीं बनाता, बल्कि वह अपने पूर्वजों से प्राप्त एक परंपरा को आगे बढ़ाता है।

कासगंज की सोनपापड़ी अपनी महीन परतों, हल्की बनावट और विशेष स्वाद के कारण अलग पहचान रखती है। यह ऐसी मिठाई है जिसे बनाने में सामग्री के साथ-साथ अनुभव और पारंपरिक कौशल की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। स्वाद की चर्चा मथुरा के बिना अधूरी है। मथुरा के पेड़े केवल एक मिठाई नहीं हैं। इनके साथ ब्रजभूमि की धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान जुड़ी हुई है। भगवान श्रीकृष्ण की नगरी मथुरा और वृंदावन आने वाले श्रद्धालु तथा पर्यटक यहां के मंदिरों और धार्मिक स्थलों के साथ-साथ मथुरा के पारंपरिक पेड़ों का स्वाद भी अपनी यात्रा की स्मृति के रूप में अपने साथ लेकर जाते हैं।

किसी मिठाई की दुकान पर बिकने वाली एक डिब्बी के पीछे अनेक लोगों का श्रम जुड़ा होता है। दूध उपलब्ध कराने वाला किसान, चीनी और अन्य सामग्री उपलब्ध कराने वाला व्यापारी, मिठाई तैयार करने वाला कारीगर, पैकेजिंग करने वाला कर्मचारी, परिवहन से जुड़े लोग, दुकानदार और विपणन से जुड़े लोग—सभी इस आर्थिक श्रृंखला का हिस्सा होते हैं। इसलिए किसी स्थानीय व्यंजन की मांग बढ़ने का अर्थ केवल मिठाई की बिक्री बढ़ना नहीं है। इसका अर्थ है स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय के नए अवसरों का निर्माण। यदि कासगंज की सोनपापड़ी और मथुरा के पेड़े जैसे पारंपरिक व्यंजनों को बेहतर पैकेजिंग, गुणवत्ता और बाजार उपलब्ध कराया जाए, तो इससे छोटे खाद्य उद्यमों को विस्तार का अवसर मिल सकता है। यही स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
यूपीआईटीएस 2026 देगा बड़े बाजार का अवसर – उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो का उद्देश्य प्रदेश की व्यापारिक और औद्योगिक क्षमता को देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत करना है। ऐसे मंच पर ODOC के माध्यम से तैयार किए जा रहे पारंपरिक व्यंजनों को प्रस्तुत करना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां केवल उपभोक्ता ही नहीं, बल्कि व्यापारी, निवेशक, खरीदार, उद्यमी और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि भी प्रदेश की क्षमता को समझने के लिए पहुंचते हैं। UPITS 2026 उत्तर प्रदेश के लिए यह संदेश देने का अवसर है कि प्रदेश के पास केवल बड़े उद्योग और आधुनिक विनिर्माण क्षमता ही नहीं, बल्कि सदियों पुरानी पाक-कला और स्थानीय खाद्य विरासत भी है।



