दुर्लभ किस्म के जन्मजात हृदय विकार से ग्रस्त प्री-टर्म नवजात की जन्म के मात्र 24-घंटे बाद ही फोर्टिस एस्कॉर्ट्स ओखला में हुई सफल ओपन हार्ट सर्जरी

फोर्टिस एस्कॉर्ट्स, ओखला में मात्र 24-घंटे की अल्पायु वाले एक ऐसे शिशु को लाया गया था जो आंख खोलते ही जीवन की लड़ाई लड़ रहा था। इस नवजात का हृदय ठीक ढंग से काम कर रहा था लेकिन फेफड़ों में कंजेशन जिसकी वजह से उसके शरीर को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिल रही थी। यह एक प्रकार का दुर्लभ, जीवनघाती जन्मजात हृदय विकार था जिसे इंफ्राडायफ्रैगमेटिक टोटल एनोमेलस पल्मोनेरी वीनस कनेक्शन (टीएपीवीसी) के नाम से जाना जाता है। इस कंडीशन में, फेफड़ों में ऑक्सीजनयुक्त रक्त हृदय तक सामान्य रूप से नहीं जा पाता और एक असामान्य रक्तनली की वजह से लिवर में चला जाता है। परिणाामस्वरूप, फेफड़े गंभीर रूप कंजेशन का शिकार हो जाते हैं, हृदय के दाएं हिस्से पर दबाव बढ़ जाता है, और जन्म के तुरंत बाद ही सांस लेने की ऐसी समस्या शुरू हो जाती है जो तत्काल सर्जिकल उपचार नहीं मिलने पर जीवनघाती भी हो सकती है।
33-वर्षीय महिला से जन्मा यह नवजात दुर्लभ हृदय विकार से ग्रस्त था जिसका पता उनकी प्रेग्नेंसी के छठे माह में एक रूटीन एंटीनेटल अल्ट्रासाउंड के दौरान लगा था और बाद में फीटल इकोकार्डियोग्राम से भी इसकी पुष्टि की गई थी। दोनों पेरेंट्स, जो कि स्वयं भी डॉक्टर ही हैं, इस सर्जरी के लिए पटना से राजधानी पहुंचे थे। उन्हें इस कंडीशन से जुड़े गंभीर जोखिमों के बारे में काफी विस्तार से बताया गया और प्रसव के तुरंत बाद सर्जरी के लिए काउंसलिंग की गई। स्पेश्यलाइज़्ड कार्डियाक केयर तक जल्द से जल्द पहुंच सुनिश्चित करने के लिए, ओखला में ही नज़दीक के एक अस्पताल में डिलीवरी करवाने की व्यवस्था की गई थी ताकि नवजात को प्रसव के तुरंत बाद ही फोर्टिस एस्कॉर्ट्स ओखला में ट्रांसफर किया जा सके। लेकिन प्रसव के तत्काल बाद ही शिशु को सांस लेने में काफी गंभीर रूप से परेशानी होने लगी थी और उसे रेस्पिरेट्री सपोर्ट पर रखा गया।
नवजात को आईसीयू में भर्ती कराया गया, जहां उसकी हालत स्थिर होने के बाद इमरजेंसी इकोकार्डियोग्राफी से डायग्नॉसिस की पुष्टि हुई। नवजात की जांच पिडियाट्रिक कार्डियाक सर्जन और एक पिडियाट्रिक कार्डियोलॉजिस्ट के द्वारा की गई। शिशु को तत्काल मेडिकल सहायता की जरूरत थी। मरीज की ओपन-हार्ट सर्जरी की गई जो करीब चार घंटे चली, और इसमें ऑक्सीजन से भरपूर रक्तप्रवाह को वापस हार्ट के बायीं ओर भेजा गया, जो कि इस प्रकार की कंडीशन में एकमात्र जीवनरक्षक उपचार होता है। इस अत्यंत जटिल सर्जरी को डॉ के एस अय्यर, चेयरमैन एंड हेड, पिडियाट्रिक एवं कन्जेनाइटल हार्ट सर्जरी तथा डॉ आशुतोष मरवाह, डायरेक्टर, पिडियाट्रिक कार्डियोलॉजी के नेतृत्व में गठित मल्टीडिसीप्लीनरी पिडियाट्रिक कार्डियाक टीम ने सफलतापूर्वक पूरा किया। सर्जरी के बाद, नवजात ने काफी संतोषजनक तरीके से रिकवरी की और 11 दिनों के बाद इस शिशु को स्थिर अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दी गई।
डॉ के एस अय्यर, चेयरमैन एंड हेड, पिडियाट्रिक एवं कन्जेनाइटल हार्ट सर्जरी, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स, ओखला ने कहा, “यह बेहद क्रिटकल कार्डियाक इमरजेंसी थी जिसमें एक-एक मिनट कीमती था। इस मामले में सबसे बड़ा फायदा यह था कि शीघ्र प्रीनेटल डायग्नॉस और प्रसव संबंधी समुचित प्लानिंग होने से सही समय पर मेडिकल सहायता का पूरा इंतजाम कर लिया गया। ऐसे मामले तुरंत इलाज नहीं मिलने पर घातक भी साबित हो सकते हैं, लेकिन समय पर सर्जरी ने इस शिशु के लिए आगे स्वस्थ जीवन का भरोसा दिया है।”डॉ पार्वती अय्यर, पिडियाट्रिक कार्डियाक इंटेसिविस्ट, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स, ओखला ने कहा, “इस शिशु को जब अस्पताल में लाया गया था तो वह गंभीर रूप से बीमार था और सर्जरी के बाद भी शुरू के कुछ दिन उसकी हालत अस्थिर रही थी। हम धीरे-धीरे उसे स्थिर बनाने में जुटे रहे और ऑपरेशन के चौथे दिन उसे वेंटिलेटर सपोर्ट से हटाया गया। इस कठिन दौर में, शिशु के पिता ने भी धैर्य और दृढ़ता की शानदार मिसाल पेश की, और हर सुबह आकर काउंसलिंग के लिए हमसे मिलते रहे। बाद में उन्होंने बताया की बातचीत ने ही उन्हें उम्मीद और साहस दिया जिसकी वजह से वह खुद को मजबूत बनाए रख सके।”



