दिल्ली: न्यू कोंडली में अतिक्रमण और श्रमिक अधिकारों से जुड़े आरोपों पर प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग

न्यू कोंडली क्षेत्र के निवासियों और स्थानीय व्यापारियों ने इलाके में बढ़ते अतिक्रमण और श्रमिकों से जुड़े कथित विवादों को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि फुटपाथों, सार्वजनिक रास्तों और अन्य सामुदायिक स्थानों पर बढ़ते कब्जों के कारण आम नागरिकों को रोजाना परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। निवासियों के अनुसार, कई स्थानों पर पैदल चलने के लिए पर्याप्त जगह नहीं बची है, जिससे बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को विशेष कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
स्थानीय दुकानदार श्रीमती विमलेश ने कहा, “अब हालात ऐसे हो गए हैं कि लोगों के पास पैदल चलने तक की जगह नहीं बची है। सार्वजनिक रास्तों पर बढ़ते कब्जों के कारण लोगों को सड़क पर चलना पड़ता है।” कई निवासियों ने क्षेत्र में बढ़ती अव्यवस्था और सार्वजनिक स्थानों के उपयोग को लेकर भी चिंता जताई है। कुछ स्थानीय लोगों का दावा है कि जब अतिक्रमण को लेकर सवाल उठाए गए, तो दुकान संचालक ऋषि गुप्ता ने कथित रूप से कहा, “सब कर रहे हैं।” निवासियों का कहना है कि ऐसी सोच के कारण अतिक्रमण की समस्या लगातार बढ़ रही है और मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। इसके अलावा, श्रमिकों के अधिकारों और वेतन भुगतान को लेकर भी आरोप सामने आए हैं। रमेश, जो क्षेत्र में सेल्समैन के रूप में कार्य कर चुके हैं, ने दावा किया कि उन्होंने शिवा गारमेंट्स में काम किया था, लेकिन काम पूरा करने के बावजूद उन्हें उनका पूरा वेतन नहीं मिला। उनका आरोप है कि भुगतान मांगने पर उन्हें डराया-धमकाया गया, जिसके बाद उन्हें नौकरी छोड़नी पड़ी।
रमेश ने आरोप लगाया, “मैंने ईमानदारी से काम किया और अपनी मेहनत की कमाई मांगी, लेकिन मुझे मेरा पूरा वेतन नहीं मिला और अंत में मुझे नौकरी छोड़नी पड़ी।” स्थानीय लोगों ने एमसीडी, डीडीए, श्रम विभाग और जिला प्रशासन से पूरे मामले की जांच करने, सार्वजनिक स्थानों को अतिक्रमण मुक्त कराने तथा श्रमिकों से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि व्यापार और रोजगार महत्वपूर्ण हैं, लेकिन सार्वजनिक सुविधाओं और श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा भी उतनी ही आवश्यक है।




