कुशल, नैतिक और दूरदर्शी नेतृत्व ही राष्ट्र निर्माण की कुंजी है : अनुराग सिंह ठाकुर, एफसीपीएलजी ‘तर्क मंच’,

फोर सेंटर फॉर पॉलिटिकल लीडरशिप एंड गवर्नेंस (FCPLG) ने पूर्व केंद्रीय मंत्री श्री अनुराग सिंह ठाकुर को सम्मानित किया तथा अपनी अंतर-महाविद्यालयीय वाद-विवाद प्रतियोगिता FCPLG–तर्क मंच के विजेताओं को प्रधानमंत्री संग्रहालय एवं पुस्तकालय ऑडिटोरियम, तीन मूर्ति भवन, नई दिल्ली में आयोजित समारोह में पुरस्कार प्रदान किए।
इस अवसर के मुख्य अतिथि थे पूर्व केंद्रीय मंत्री श्री अनुराग सिंह ठाकुर, जो वर्तमान में लोकसभा के माननीय सदस्य एवं कोयला, खदान एवं इस्पात संबंधी संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष हैं। कार्यक्रम में नीतिगत विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और शासन एवं सार्वजनिक नेतृत्व में योगदान देने की आकांक्षा रखने वाले विद्यार्थियों ने भाग लिया।
श्री ठाकुर ने कहा कि आज भारत को कुशल, नैतिक और दूरदर्शी नेतृत्व की आवश्यकता है। सच्चा नेतृत्व ऊँचे पदों या बड़े मंचों पर निर्भर नहीं करता, बल्कि उन दैनिक कार्यों पर आधारित होता है जो वास्तविक बदलाव लाते हैं। उन्होंने आगे कहा, “भारत की सबसे बड़ी ताकत उसके 40 करोड़ युवा नागरिक हैं, जो विकसित भारत @2047 के दृष्टिकोण को साकार करने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे। युवाओं को शासन और नीति-निर्माण में सक्रिय भागीदारी करनी होगी और वंशवाद की राजनीति जैसी चुनौतियों के प्रति सतर्क रहना होगा। लोकतंत्र में नेताओं से अपेक्षा की जाती है कि वे जनता के साथ कदम से कदम मिलाकर चलें, न कि अंधी निष्ठा की माँग करें।”
एफसीपीएलजी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. अभय आनंद तिवारी ने कहा, “हम भविष्य के ऐसे नेताओं को तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जो मूल्यों में निहित हों और आने वाले समय की चुनौतियों का समाधान कर सकें। यह सम्मान और वाद-विवाद प्रतियोगिता हमारे मिशन को दर्शाता है, जिसके माध्यम से हम युवाओं को विचारों से जुड़ने, दृष्टिकोण को परिष्कृत करने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सार्थक योगदान देने के लिए मंच प्रदान करते हैं।”
फोर के चेयरमैन डॉ. बी.बी.एल. माधुकर ने अपने विशेष संबोधन में कहा, “भारत की जनसांख्यिकीय बढ़त (demographic dividend) हमारी सबसे बड़ी संपत्ति है। संवाद, वाद-विवाद और परामर्श को बढ़ावा देकर एफसीपीएलजी युवाओं को जिम्मेदारी निभाने, आलोचनात्मक सोच विकसित करने और नेतृत्व भूमिकाएँ निभाने के लिए सशक्त बनाना चाहता है।”



