दिल्ली एनसीआर

स्ट्रोक केयर के क्षेत्र में नई पहल, आर्टेमिस हॉस्पिटल्स का नया प्रोग्राम ‘‘समय’’

गुरुग्राम, एनसीआर, 28 अगस्त, 2024; स्ट्रोक भारत में मृत्यु का दूसरा सबसे आम कारण है। भारत में हर साल लगभग 1,85,000 स्ट्रोक के मामले सामने आते हैं। यानी लगभग हर 40 सेकंड में एक व्यक्ति स्ट्रोक का शिकार होता है और हर 4 मिनट में इससे एक व्यक्ति की जान चली जाती है। 2023 में छपे एक लेख में यह तथ्य सामने आया था कि स्ट्रोक के मामले में भारत की स्थिति सबसे जटिल है।

स्ट्रोक के 68.6 प्रतिशत मामले भारत से जुड़े हैं। स्ट्रोक के कारण जान गंवाने वाले 70.9 प्रतिशत भारत में हैं। वहीं, डिसएबिलिटी एडजस्टेड लाइफ ईयर्स लॉस्ट (दिव्यांगता के कारण जीवन प्रत्याशा में आई कमी) में भारत की हिस्सेदारी 77.7 प्रतिशत है। वहीं लैंसेट न्यूरोलॉजी जर्नल (आईसीएमआर रिलीज) में प्रकाशित एक अन्य रिपोर्ट में कहा गया है कि स्ट्रोक के मामले में बचाव और उपचार दोनों की संभावना ज्यादा रहती है। लेकिन ध्यान न दिया गया तो 2050 तक यह सालाना 1 करोड़ मौतों का कारण बन सकता है। रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि स्ट्रोक से होने वाली मौतों की संख्या 2020 में 66 लाख से बढ़कर 2050 तक 97 लाख हो जाने की आशंका है। भारत में स्ट्रोक इमर्जेंसी को ध्यान में रखकर आर्टेमिस हॉस्पिटल्स ने एक नए कार्यक्रम, ‘‘समय’’ – स्ट्रोक, एक्टिंग विदिन, मिनट्स, एड्स टू, इयर्स की शुरुआत की है। यह कार्यक्रम स्ट्रोक केयर के क्षेत्र में क्रांति लाने और भारत में स्ट्रोक के बढ़ते संकट से निपटने के प्रयासों पर केंद्रित है। समय, एक्यूट स्ट्रोक केयर की दिशा में एक बड़ा कदम है और उन्नत चिकित्सा सेवाओं एवं परिणाम को बेहतर करने की दिशा में आर्टेमिस हॉस्पिटल्स की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।

डॉ. सुमित सिंह (चीफ ऑफ न्यूरोलॉजी एंड स्ट्रोक सर्विसेज), डॉ. आदित्य गुप्ता (चेयरपर्सन – न्यूरोसर्जरी एंड सीएनएस रेडियोसर्जरी एवं को-चीफ – साइबरनाइफ सेंटर), डॉ. एस. के. राजन (चीफ – न्यूरो स्पाइन सर्जरी एवं एडिशनल डायरेक्टर – न्यूरोसर्जरी), डॉ. तारीक मतीन (चीफ एवं डायरेक्टर- न्यूरो इंटरवेंशन) तथा डॉ. सौरभ आनंद (चीफ ऑफ न्यूरोएनेस्थीसिया एंड न्यूरो क्रिटिकल केयर) उपस्थित रहे। इस पहल के बारे में आर्टेमिस हॉस्पिटल्स की एमडी डॉ. देवलीना चक्रवर्ती ने कहा, ‘‘समय के साथ हमारा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि स्ट्रोक के प्रत्येक मरीज को तत्काल एवं विशेष देखभाल प्राप्त हो। उन्होंने आगे कहा, बात जब स्ट्रोक के इलाज की हो, तो समय बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है और ऐसे में ‘समय’ के रूप में हमारी पहल से इस तरह की स्थिति में तेजी से एवं प्रभावी तरीके से कदम उठाने की हमारी क्षमता बढ़ेगी और स्ट्रोक के कारण जान गंवाने वालों की संख्या में कमी आएगी।

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