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सेंट्रल पार्क में भक्ति की गूंज के साथ भक्ति संगीत उत्सव 2026 का समापन

रविवार शाम भक्ति संगीत उत्सव 2026 का भव्य और भावपूर्ण समापन हुआ। तीन दिनों तक चले इस उत्सव की अंतिम संध्या में बड़ी संख्या में श्रोता भक्ति संगीत की मधुर धारा में डूबते नजर आए। दिल्ली सरकार के कला, संस्कृति एवं भाषा विभाग के अंतर्गत साहित्य कला परिषद द्वारा आयोजित इस उत्सव ने पहले दो दिनों में भी उत्कृष्ट प्रस्तुतियों के जरिए दर्शकों का दिल जीता था।

समापन संध्या में तीन कलाकार— नितिन कुमार, धनंजय हेगड़े और अंशु थपलियाल— ने अपनी प्रस्तुतियों से भक्ति संगीत की विविध परंपराओं को जीवंत कर दिया और ऐसा आध्यात्मिक माहौल रचा जिसने श्रोताओं के मन को गहराई से स्पर्श किया। तीन दिनों तक चलने वाले इस भव्य समारोह की तीसरी और अंतिम प्रस्तुति इंडियन आइडल फेम नितिन कुमार के ऊर्जावान गायन से हुआ। भक्ति गायन के लिए पहचाने जाने वाले नितिन कुमार ने अपने पहले ही गीत “राधा रानी” से वातावरण को भक्तिमय बना दिया। इसके बाद उन्होंने “कान्हा तेरे प्यार में” और “मेरे बांके बिहारी लाल” जैसे लोकप्रिय भजनों से श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। कई दर्शक इन भजनों के साथ गुनगुनाते नजर आए। अपनी प्रस्तुति का समापन उन्होंने “ॐ नमः शिवाय” से किया, जिसने कृष्ण भक्ति की मधुरता से शिव आराधना की गहनता तक का आध्यात्मिक अनुभव श्रोताओं को कराया। इसके बाद दूसरी प्रस्तुति गायक *धनंजय हेगड़े की रही।* उन्होंने संत कवियों की रचनाओं से सजे अपने कार्यक्रम की शुरुआत कबीर के पद *“गुरु बिन कौन बतावे बाट” से की, जिसमें गुरु की महत्ता का भावपूर्ण वर्णन है। इसके बाद तुलसीदास रचित “गाइए गणपति जग वंदन” से वातावरण में उल्लास और मंगल का भाव भर गया। उन्होंने मीरा के भजन “चलो मन गंगा यमुना तीर” और “मन माने जब तार प्रभु जी” भी प्रस्तुत किए। अपनी प्रस्तुति का समापन उन्होंने “भजो मधुर हरि नाम निरंतर” भजन से किया, जिसने पूरे वातावरण को शांति और आध्यात्मिकता से भर दिया। इसके बाद मंच संभाला गायिका *अंशु थपलियाल ने, जिनकी प्रस्तुति इस संध्या की तीसरी प्रस्तुति रही। उनकी गायकी में साहित्यिक गहराई और आध्यात्मिक संवेदना का सुंदर संगम दिखाई देता है। उन्होंने संत कबीर के प्रसिद्ध पद “कौन ठगवा नगरिया लूटल हो” से अपनी प्रस्तुति की शुरुआत की, जो जीवन की आध्यात्मिक खोज पर एक गहन चिंतन प्रस्तुत करता है। इसके बाद उन्होंने मीरा के पद “राणाजी मैं तो गोविंद गुण गाना” और “नाहीं ऐसो जनम बारंबार” प्रस्तुत किए। इन भजनों के माध्यम से उन्होंने मीरा की कृष्ण भक्ति और समर्पण की भावना को बड़ी संवेदनशीलता के साथ दर्शकों तक पहुंचाया।

तीन दिनों तक चले इस उत्सव में कुल नौ कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियां दीं और भक्ति संगीत की विभिन्न परंपराओं को दर्शकों के सामने जीवंत किया। यह उत्सव केवल संगीत का कार्यक्रम नहीं बल्कि भारत की उस सांस्कृतिक परंपरा की याद दिलाने वाला अवसर था, जिसमें भक्ति सदियों से समाज को जोड़ने वाली सबसे सहज और लोकतांत्रिक धारा रही है

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