नेब सराय की झुग्गियों में लगी आग में मां बेटी की मौत ने प्रशासनिक व्यवस्था पर प्रश्न चिन्ह लगाया

दक्षिणी दिल्ली के नेबसराय की झुग्गियों में सोमवार 2:00 बजे देर रात लगी आग में मां-बेटी की मौत के बाद प्रशासनिक व्यवस्था की लापरवाही सामने आई है। झुग्गी बस्ती में 13 साल की बच्ची रुबीना और 42 साल की मां फ़िरोजा की मौत का कारण वहां एंबुलेंस का समय पर नहीं पहुंचाना और दिल्ली दमकल की गाड़ियों का इंक्रोचमेंट की वजह से देर से पहुंचना रहा। डेढ़ साल पहले भी इसी झुग्गी में लगी आग में एक घोड़े की मौत हो गई थी और 500 झुग्गी जल गई थी। इस बात का खुलासा बच्चों और हासिए पर रह रहे लोगों के लिए काम करने वाली संगठन एलाइंस और पीपुल्स राइट्स (एपीआर) की संयोजक रीना बनर्जी, संतलाल, शांतनु और पंकज सिंह बे बुधवार को प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में कही।
रीना बनर्जी ने कहा कि नेबसराय की घटना पूरी तरह प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम है। उन्होंने कहा कि यहाँ की समस्या के लिए स्थानीय सांसद, विधायक, निगम पार्षद के साथ जिलाधिकारी, एसडीम डीडीए, डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (साउथ) सहित दिल्ली महिला आयोग को कई बार पत्र लिखा गया, लेकिन कुछ भी नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि अगर समय पर कार्रवाई होती तो मां बेटी की जान बच सकती थी। संगठन ने दिल्ली सरकार से इस परिवार को मुआवजा देने की मांग की है साथ ही दिल्ली जैसे शहर के एक गांव में इस तरह की घटनाएं आगे नहीं हो इसके लिए समुचित कार्रवाई करनी चाहिए।
नेब सराय की दर्दनाक घटना में 100 से अधिक परिवार प्रभावित हुए हैं। नेब सराय की ओर जाने वाले सभी रास्तों पर अवैध अतिक्रमण के कारण, दमकल और एंबुलेंस सेवाओं को घटनास्थल पर पहुंचने में लगभग 3 घंटे बाद पहुंची। एपीआर ने मांग की है कि निष्पक्ष जांच करें और जिम्मेदार अधिकारियों को दंडित करें। नेब सराय क्षेत्र के लिए तुरंत लिंक रोड का निर्माण करें। अवरुद्ध सड़कों को तुरंत खोलें। पीपल्स राइट्स गठबंधन (एपीआर) दिल्ली में बच्चों से संबंधित मुद्दों पर सक्रिय रूप से काम करता है। यह संगठन हर बच्चे के लिए एक सुरक्षित, गरिमापूर्ण और अधिकार-संपन्न जीवन सुनिश्चित करने का प्रयास करता है। एपीआर विशेष रूप से हाशिए पर रहने वाले और वंचित बच्चों पर ध्यान केंद्रित करता है, जो अक्सर शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल और सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहते हैं।



