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बुजुर्ग मरीज की उम्र के चलते कई अस्पतालों ने इससे पहले इलाज से इंकार कर दिया था, अब सर्जरी के बाद मरीज आत्मनिर्भर बनीं

103 साल की उम्र में किसी भी बुजुर्ग के लिए इससे बुरा क्या हो सकता है कि वह अचानक वॉशरूम में गिर जाएं और कूल्हे में फ्रैक्चर हो जाए, जिसके बाद अगले करीब एक माह तक उनकी जिंदगी बिस्तर तक सिमटकर रह जाए। लेकिन, फोर्टिस मानेसर के डॉक्टरों ने असाधारण धैर्य और उन्नत मेडिकल क्षमताओं का परिचय देते हुए, उक्त बुजुर्ग मरीज की जटिल हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी को पूरा कर उन्हें कुछ ही हफ्तों में न सिर्फ उनकी मोबिलिटी लौटायी बल्कि चलने-फिरने में भी आत्मनिर्भर बनाया। डॉ रोहित लांबा, डायरेक्अर – ऑर्थोपिडिक्स, फोर्टिस हॉस्पीटल मानेसर, के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने इस सर्जरी के लिए एडवांस इंप्लांट तकनीक का इस्तेमाल किया जो दरअसल, बुजुर्ग मरीजों के मामलों में सर्जरी के जोखिमों को कम करने के उद्देश्य से खासतौर से तैयार की गई है।

बुलंदशहर की श्रीमती रहमत अनीशा अपने बाथरूम में गिर गई थीं जिसके कारण उनके कूल्हे की हड्डी में फ्रैक्टचर हो गया था। इस प्रकार के फ्रैक्चर बुजुर्गों के लिए काफी जोखिम भरे साबित होते हैं, खासतौर से यदि मरीज ऑस्टियोपोरोसिस से भी पीड़ित हों तो स्थिति और अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकती है, और इस वजह से वे लंबे समय तक चलने-फिरने लायक नहीं रहते और सेहत पर भी बुरा असर पड़ता है। मरीज की अधिक उम्र और सर्जरी से जुड़े जोखिमों के मद्देनज़र, उनके होमटाउन में अस्पतालों ने उनका इलाज करने से इंकार कर दिया था, जिसकी वजह से वह करीब एक महीने तक बिस्तर में सिमटकर रहने को मजबूर हो गई थीं। इस दौरान वह काफी दर्द भी झेलने को मजबूर थीं। तब गुरुग्राम में उनके कुछ रिश्तेदारों ने फोर्टिस मानेसर में स्पेश्यलिस्ट डॉक्टरों से इस बारे में सलाह-मश्विरा किया, और उनकी विस्तृत जांच के बाद एडवांस उपचार के लिए उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया।

फोर्टिस हॉस्पीटल, मानेसर में भर्ती होने के बाद, मरीज की कई तरह की मेडिकल जांच हुईं और रिस्क ऑप्टीमाइज़ेशन के बाद, डॉ रोहित लांबा के नेतृत्व में ऑर्थोपिडिक टीम ने उन्हें स्पाइनल एनेस्थीसिया देकर उनकी राइट मॉड्यूलर बाइपोलर हेमीआर्थोप्लास्टी को सफलतापूर्वक पूरा किया। सर्जरी के दौरान या बाद में इससे जुड़े जोखिमों को कम करने के लिए, टीम ने पारंपरिक सीमेंट युक्त फिक्सेशन की बजाय यूएसएफडीए-स्वीकृत अमेरिकन प्लांट्स का उपयोग करते हुए एडवांस अनसीमेंटेड कॉलर्ड इंप्लांट तकनीक का इस्तेमाल किया। इसका एक बड़ा लाभ यह हुआ कि संभावित बोन सीमेंट-संबंधी जटिलताओं से बचाव हुआ, सर्जिकल समय को कम किया जा सका, और तुरंत ही पोस्ट-ऑपरेटिव वेट बियरिंग भी संभव हो सकी। इस पूरी सर्जरी को केवल 30 मिनट में पूरा किया गया। मरीज ने सर्जरी के बाद बिना किसी जटिलता के रिकवरी की और 6 बाद ही उन्हें स्थिर अवस्था में अस्पताल से छुट्टी भी मिल गई। फौलो-अप में भी उक्त तरीज की हालत में काफी उल्लेखनीय सुधार पाया गया और वह वॉकर या वॉकिंग स्टिक की सहायता के बगैर ही अपने आप चलने-फिरने में समर्थ थीं।

इस मामले की जानकारी देते हुए, डॉ रोहित लांबा, डायरेक्टर, फोर्टिस हॉस्पीटल मानेसर ने कहा, “इस केस में, मरीज पिछले करीब एक महीने से बिस्तर पर थीं, जिसके वजह से बेड सोर, निमोनिया, डीप वेन थ्रोम्बोसिस और अन्य कई रुग्णताओं का खतरा काफी अधिक था। यह मामला मरीज की अधिक उम्र और सर्जरी से जुड़े अन्य कई जोखिमों की वजह से भी काफी चुनौतीपूर्ण था। दुनियाभर में सौ साल से अधिक उम्र के मरीजों की हिप आर्थोप्लास्टी की रिपोर्टें काफी कम हैं, और इससे भी यह साबित होता है कि मल्टीडिसीप्लीनरी केयर तथा एडवांस सर्जिकल प्लानिंग से बेहद जटिल परेशानियों से जूझ रहे बुजुर्ग मरीजों में भी सकारात्मक नतीजे हासिल किए जा सकते हैं।”

श्री इंद्रजीत कुमार सिंह, फैसिलिटी डायरेक्टर, फोर्टिस हॉस्पीटल मानेसर ने कहा, “जटिल हिप फ्रैक्चर से जूझ रही 103-वर्षीय बुजुर्ग महिला मरीज को उनकी खोयी मोबिलिटी और आत्मनिर्भरता वापस दिलाना फोर्टिस मानेसर के लिए किसी क्लीनिकल उपलब्धि से कम नहीं है और यह हमारे पास उपलब्ध उन्नत ऑर्थोपिडिक विशेषज्ञता को भी दर्शाता है। इस मामले ने यह भी साबित किया कि मरीज की उम्र को उपचार की राह में अड़चन नहीं बनना चाहिए। सही क्लीनिकल मूल्यांकन, सर्जिकल प्लानिंग और मल्टीडिसीप्लीनरी केयर से, अधिक उम्र वाले मरीज भी ठीक-ठाक ढंग से स्वास्थ्यलाभ कर सकते हैं जिससे उनके जीवन की गुणवत्ता पर काफी असर पड़ता है।”

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