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अश्विनी उपाध्याय ने न्यायालयों में शपथ लेकर झूठ बोलने (परज्यूरी) को न्यायिक व्यवस्था की पवित्रता के लिए संकट माना

अश्विनी उपाध्याय ने न्यायालयों में शपथ लेकर झूठ बोलने (परज्यूरी) को न्यायिक व्यवस्था की पवित्रता के लिए संकट मानास्वयंसेवकों द्वारा संचालित यह संगठन न्यायिक व्यवस्था के लिए भीतर न्याय को बढ़ावा देने के लिए समर्पित है। कॉन्फ्रेंस की थीम एक मजबूत परज्यूरी लॉ (झूठी गवाही पर दंड) बनाने पर केंद्रित रही। प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में शनिवार को आयोजित कार्यक्रम को सुप्रीम कोर्ट के प्रसिद्ध अधिवक्ता श्री अश्विनी उपाध्याय और दिल्ली बार काउंसिल के सह-अध्यक्ष श्री विष्णु शर्मा ने संबोधित किया।

न्यायिक भाषा में परज्यूरी उस कृत्य को कहते हैं, जब कोई न्यायालय में शपथ लेकर झूठ बोलता है यानी झूठी गवाही देता है। यह एक गंभीर अपराध है, जिससे न्यायिक व्यवस्था की अखंडता को चोट पहुंचती है। विभिन्न उच्च न्यायालयों और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा बार-बार चिंता जताए जाने के बावजूद परज्यूरी की समस्या को उचित तरीके से हल नहीं किया जा रहा है। न ही इसकी गंभीरता को समझा जा रहा है। टीम सतयुग का मानना है कि परज्यूरी केवल तकनीकी मामला नहीं है, बल्कि यह राजनीतिक इच्छाशक्ति से जुड़ा हुआ मामला भी है।

स्वयंसेवकों द्वारा संचालित यह संगठन न्यायिक व्यवस्था के लिए भीतर न्याय को बढ़ावा देने के लिए समर्पित है। कॉन्फ्रेंस की थीम एक मजबूत परज्यूरी लॉ (झूठी गवाही पर दंड) बनाने पर केंद्रित रही। प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में शनिवार को आयोजित कार्यक्रम को सुप्रीम कोर्ट के प्रसिद्ध अधिवक्ता श्री अश्विनी उपाध्याय और दिल्ली बार काउंसिल के सह-अध्यक्ष श्री विष्णु शर्मा ने संबोधित किया। कार्यक्रम के दौरान न्यायिक व्यवस्था के भीतर के जटिल मुद्दों को सामने रखा गया, साथ ही परज्यूरी से प्रभावी तरीके से निपटने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति की जरूरत पर बल दिया गया।

इस विषय पर अपने संबोधन में सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता श्री अश्विनी उपाध्याय ने कहा, ‘परज्यूरी यानी न्यायालय में शपथ लेकर झूठ बोलना न्यायिक व्यवस्था की पवित्रता के लिए बहुत बड़ा संकट है। इस समस्या की गंभीरता को न समझते हुए हम अपनी अदालतों की अखंडता को छिन्न-भिन्न करने की अनुमित दे रहे हैं। एक सख्त परज्यूरी लॉ बनाने की दिशा में टीम सतयुग की पहल ‘सभी के लिए न्याय’ की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। हमारा लक्ष्य है कि लोगों को एक वर्ष के भीतर न्याय मिले। अपने स्वयंसेवकों के साझा प्रयासों से हम इस सपने को अवश्य साकार कर सकेंगे।’

दिल्ली बार काउंसिल के सह-अध्यक्ष श्री विष्णु शर्मा ने कहा, ‘एक सख्त परज्यूरी कानून का कियान्वयन न्यायिक व्यवस्था की विश्वसनीयता को पुनर्स्थापित करने के लिए बहुत जरूरी है।

टीम सतयुग के संस्थापक सदस्य श्री विशाल गुप्ता ने कहा, ‘हमारा लक्ष्य लोगों को न्यायपूर्ण समाज निर्माण में योगदान देने में सक्षम बनाना है। वन-टाइम एमनेस्टी प्रोग्राम (एक बार माफी) से परज्यूरी की समस्या का सामना करने में बड़ी मदद मिलेगी। इससे न केवल लंबित पड़े मामलों को कम करने में मदद मिलेगी, बल्कि इससे हमारी न्यायिक व्यवस्था में लोगों का भरोसा भी पुनर्स्थापित होगा। हम सभी से इस आदर्श पहल का हिस्सा बनने  की अपील करते हैं, रोजाना केवल अपना एक घंटे का समय न्याय को समर्पित करें, जिससे उल्लेखनीय बदलाव लाया जा सकता है।’

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