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नई उम्मीदों के साथ आईवीएफ में सफलता अब मुमकिन

इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) तकनीक ने आज लाखों नि:संतान दंपतियों को संतान सुख प्रदान करने का सपना साकार किया है।भारत में हर 6 में से 1 दंपति को संतान प्राप्ति में कठिनाई होती है। ऐसे में IVF तकनीक अत्यंत प्रभावी साबित हो रही है। इस प्रक्रिया में महिला के अंडाणु और पुरुष के शुक्राणु को प्रयोगशाला में निषेचित कर भ्रूण तैयार किया जाता है, जिसे बाद में महिला के गर्भाशय में स्थापित किया जाता है।

हाल ही में देश के कई प्रतिष्ठित आईवीएफ क्लीनिकों में सफलता दर 60-70% तक पहुंची है, जो इस तकनीक में लगातार हो रहे सुधार का प्रमाण है। विशेषज्ञों ने समाज से IVF से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने की अपील की है। IVF सिर्फ एक चिकित्सा प्रक्रिया नहीं, बल्कि माता-पिता बनने की उम्मीद का दूसरा नाम है।

डॉ. पूनीत राणा अरोड़ा – IVF विशेषज्ञ (CIFAR),गुरुग्राम का कहना है कि सही समय पर जांच और उपचार शुरू करने से सफलता की संभावना बढ़ जाती है। साथ ही, जागरूकता भी बेहद ज़रूरी है, ताकि लोग बिना झिझक IVF जैसी तकनीकों का सहारा ले सकें। IVF आज के समय की एक सशक्त चिकित्सा विधि है, जो नि:संतानता को मात देकर माता-पिता बनने का सपना साकार करती है। महिलाएं अब करियर के साथ-साथ परिवार की भी योजना IVF के माध्यम से आसानी से कर पा रही हैं। यह तकनीक न केवल संतानहीनता का समाधान है, बल्कि यह आत्मविश्वास और मानसिक शांति भी देती है।

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